राजस्थान में नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाले लोगों को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। अब भरतपुर में दो लोगों को जान से मारने की धमकी का मामला सामने आया है। इस मुद्दे पर चल रही एक टीवी डिबेट में उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने सिर तन से जुदा की धमकी देने वालों को नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि ऐसी बातें करने वालों का बुखार एक महीने में उतर जाएगा।
उन्होंने कहा कि इन लोगों का इलाज सिर्फ पुलिस के पास है, ये जो मियादी बुखार वाले लोग हैं वो आते हैं और डेढ़ महीने बाद गायब हो जाते हैं। उन्होंने राजस्थान सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि पहले वहां की सरकार को तय करना होगा कि वो कोई एक्शन लेना भी चाहती है या नहीं।
उन्होंने कहा, “इस तरह के जो बयान दे रहे हैं, उनका दिमागी रूप से इलाज करवाना चाहिए। जब वो इलाज पूरा हो जाए फिर पुलिस को अपनी कार्रवाई करनी चाहिए। ये तमाशा और सर्कस ज्यादा दिन नहीं चलना चाहिए। गला काटने का जो मजाक चल रहा है, जेल में जब 18 घंटे श्रमदान करना पड़ेगा सारी हवा निकल जाएगी। इस तरह की बातें बिल्कुल बर्दाश्त करने के लायक नहीं हैं।”
डिबेट में शामिल एक पैनलिस्ट सैय्यद जव्वाद ने नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया तो इस पर पूर्व डीजीपी ने कहा कि कानून की बुनियाद और जांच के बाद जरूर होना चाहिए, लेकिन किसी के कहने पर नहीं। उन्होंने कहा कि जब जांचकर्ता कहेगा तभी इस तरह की कोई कार्रवाई की जाएगी।
पैनलिस्ट सैय्यद जव्वाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ऑब्जर्वेशन के बाद भी इसमें ढिलाई क्यों बरती जा रही है। इस पर विक्रम सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ऑब्जर्वेशन मोखिक हैं, जो महत्वपूर्ण हैं, लेकिन बहुत ज्यादा मायने नहीं रखते हैं। उन्होंने कहा कि जांच में हस्तक्षेप का किसी को अधिकार नहीं है और सिर्फ एफआईआर के दम पर जेल के अंदर नहीं डाल सकते। उन्होंने कहा कि तस्लीम रहमानी ने नूपुर शर्मा को उकसाया था टाईम्स नाओ के मंच पर। तो फिर सिर्फ एक आदमी की गिरफ्तारी नहीं होगी, उसमें जो-जो शामिल थे सबकी गिरफ्तारी होगी।