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2जी घोटाला: ए राजा ने मनमोहन सिंह की चुप्पी पर उठाए सवाल, किताब में लिखा- सीएजी विनोद राय थे सूत्रधार

बतौर राजा, जब पीएम मनमोहन सिंह से मुलाकात हुई तो वो उदार और घबराए हुए थे। हालांकि, मनमोहन सिंह ने तब उन्हें चाय ऑफर की थी और राजा ने उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया।

राजा ने लिखा है कि जिस नेता ने देश में तकनीकि क्रांति लाई उसे ही जेल भेज दिया गया। (फोटो- PTI)

पूर्व दूरसंचार मंत्री और 2जी घोटाले में हाल ही में बरी हुए डीएमके नेता ए राजा ने अपनी किताब ‘2जी सागा अनफोल्ड्स-ए राजा’ में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधा है। शीघ्र प्रकाशित होने वाली इस किताब में राजा ने लिखा है कि 2जी घोटालों के सूत्रधार पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) विनोद राय थे। उन्होंने लिखा है कि मनमोहन सिंह को उनके सलाहकारों ने गलत तथ्य पेश किए थे। बावजूद इसके वो चुप्पी साधे रहे। राजा ने लिखा है कि मनमोहन सिंह की चुप्पी देश की सामूहिक अंतारात्मा की चुप्पी की तरह थी। लेखक ने किताब में इस बात का भी उल्लेख किया है कि टेलिकॉम लॉबी ने प्रधानमंत्री कार्यालय पर भी प्रभाव डाला था। बता दें कि इस हाई प्रोफाइल केस में 21 दिसंबर को सीबीआई कोर्ट ने ए राजा और डीएमके सांसद कनिमोझी समेत सभी 17 आरोपियों को बरी कर दिया था।

इस महीने के आखिर तक रिलीज होने वाली इस किताब में ए राजा ने लिखा है कि तत्कालीन सीएजी विनोद राय ने 1.76 लाख करोड़ रूपये के राजस्व नुकसान का सिद्धांत दिया था। इस वजह से वही इस घोटाले का सूत्रधार थे। राजा ने लिखा है कि विनोद राय के दावे निराधार और काल्पनिक थे। उनकी रिपोर्ट कचरा मात्र था जिसे सर्वसम्मति से डस्टबिन के लायक माना गया है। यहां तक कि उनके कथन भी अदालती क्रॉस एग्जामिनेशन में नहीं टिक सके। राजा ने लिखा है कि विनोद राय के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए। राजा ने सीएजी रिपोर्ट बारे में लिखा है, “यह वैसी ही है, जैसे एक बिल्ली आंख बंद करके कहती है कि पूरा ब्राह्मांड अंधकारमय है।”

सीबीआई कोर्ट द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन केस से बरी होने से पांच दिन बाद ए राजा ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को लिखा है कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया, जो किया वो राष्ट्रीय हित में था। 26 दिसंबर, 2017 को लिखे पत्र में राजा ने मनमोहन सिंह कैबिनेट के कुछ सहयोगियों पर भी निशाना साधा है और उन्हें इस संकट की घड़ी में विश्वस्त नहीं ठहराया है। हालांकि, राजा ने किसी भी मंत्री का नाम नहीं लिखा है।

राजा ने लिखा है कि स्पेक्ट्रम आवंटन केस में सीबीआई छापे के बारे में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को कुछ भी पता नहीं था। राजा ने लिखा है, “22 अक्टूबर 2009 को (सीबीआई ने टेलीकॉम मिनिस्ट्री और कुछ दूरसंचार ऑपरेटरों के कार्यालयों पर छापे मारे थे) मैं लगभग 7.00 बजे साउथ ब्लॉक में अपने कार्यालय में प्रधानमंत्री से मिला। वहां टीकीए नायर (पीएमओ में तत्कालीन प्रधान सचिव) भी मौजूद थे। लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था कि जब प्रधानमंत्री सिंह को सीबीआई के छापे के बारे में पता चला तो वो चकित रह गए थे।”

राजा ने अपने इस्तीफे के घटनाक्रम का भी उल्लेख किताब में किया है। उन्होंने लिखा है कि जब वो 14 नवंबर 2009 की शाम चेन्नई से दिल्ली आए तो रात करीब 9 बजे टी आर बालू ने बताया था कि पार्टी के नेता की सलाह के मुताबिक इस्तीफा दे दें। राजा ने लिखा है कि इसके बाद उन्होंने अपने पीए से पीएम से मीटिंग फिक्स कराने को कहा। इस बीच इस्तीफा तैयार कराया फिर पीएम हाउस चले गए। बतौर राजा, जब पीएम मनमोहन सिंह से मुलाकात हुई तो वो उदार और घबराए हुए थे। हालांकि, मनमोहन सिंह ने तब उन्हें चाय ऑफर की थी और राजा ने उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया।

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