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‘सुप्रीम कोर्ट का जज कैसा हो? अरुण मिश्रा जैसा हो’, पीएम मोदी की तारीफ करने पर SC के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू ने मौजूदा जज पर मारा ताना

जस्टिस अरुण मिश्रा के इन बयानों पर वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण भी निशाना साध चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कण्डेय काटजू (Express photo by Jaipal Singh)

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने मौजूदा जज जस्टिस अरुण मिश्रा के एक बयान पर ताना मारा है। उन्होंने शनिवार (22 फरवरी, 2020) को ट्वीट कर लिखा, ‘सुप्रीम कोर्ट का जज कैसा हो? अरुण मिश्रा जैसा हो।’ दरअसल जस्टिस काटजू की प्रतिक्रिया जस्टिस मिश्रा के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी को बहुमुखी प्रतिभा वाला ऐसा नेता बताया जिसकी सोच वैश्विक स्तर की है।

सुप्रीम कोर्ट में अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन 2020 ‘न्यायपालिका और बदलती दुनिया’ के उद्घाटन समारोह में जस्टिस मिश्रा ने यह बात कही थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा था कि मोदी वैश्विक स्तर के बावजूद स्थानीय हितों को अनदेखा नहीं करते। जस्टिस मिश्रा के इन्हीं बयानों जस्टिस काटजू ने रविवार को भी ताना मारा। उन्होंने लिखा, ‘देश का हाकिम कैसा हो? अरुण मिश्रा जैसा हो।’

यहां देखें उनका ट्वीट-

अपने भाषण में जस्टिस मिश्रा ने अप्रचलित हो चुके 1500 से ज्यादा कानूनों को खत्म करने के लिए मोदी और केंद्रीय विधि मंत्री रवि शंकर प्रसाद की तारीफ करते हुए कहा था कि मोदी के नेतृत्व में भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय का जिम्मेदार और सबसे अनुकूल सदस्य है। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्यायपालिका के समक्ष चुनौतियां समान हैं और बदलती दुनिया में न्यायपालिका की भूमिका महत्वपूर्ण है।

सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठता में तीसरे स्थान पर आने वाले जस्टिस मिश्रा ने सम्मेलन के शुभारंभ के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया था। जस्टिस मिश्रा के इन बयानों पर वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण भी निशाना साध चुके हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि ‘क्या आपको आश्चर्य है कि SC आपके अधिकारों की रक्षा क्यों नहीं कर रहा है?’

उल्लेखनीय है कि जस्टिस काटजू के ट्वीट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी प्रतिक्रियाएं दी हैं। प्रदीप शाह @PradipS56485621 लिखते हैं, ‘सुप्रीम कोर्ट का जज कैसा हो। मार्कण्डेय काटजू जैसा तो बिल्कुल ना हो।’ शारिब अखलाख @sharib_official लिखते हैं, ‘अरुण मिश्रा वही जज हैं जो लोया मर्डर केस में अमित शाह को क्लीन चिट दे देते हैं।’

एक यूजर लिखते हैं, ‘अच्छा व्यंग है महोदय। वास्तव में यह देश और न्यायपालिका के लिए कठिन समय है।’ मोहम्मद अली @MdALI05201521 लिखते हैं, ‘क्या हो रहा है। न्यायिक सेवा खत्म हो चुकी है?’ सुमित बंसल @sumitbansalsgnr लिखते हैं, ‘अंतिम और सबसे आशाजनक संगठन अब सीबीआई की तरह कठपुतली बन गया।’ एस उपाध्याय @saurabhup7116 लिखते हैं ‘अब समझ में आ रहा कि सब फैसले एकमुखी क्यों आ रहे।’

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