ताज़ा खबर
 

पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे की राय- मुसलमान और संविधान के खिलाफ नहीं है CAB

पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने कहा कि CAB मुस्लिम विरोधी नहीं है और ये संविधान के अनुच्छेद 14, 15 या 21 का भी उल्लंघन नहीं करता।

Author नई दिल्ली | Published on: December 11, 2019 8:23 AM
पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे।

नागरिकता संशोधन बिल (CAB) लोकसभा में पास होने के बाद सरकार पर संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों के उल्लंघन के आरोप लगने के बीच पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि ये बिल संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और यहां क 21 का उल्लंघन नहीं करता है। बता दें कि अनुच्छेद 14 में विधि के समक्ष समानता का जिक्र है, इसका अर्थ यह है कि राज्य सभी व्यक्तियों के लिए एक समान कानून बनाएगा तथा उन पर एक समान ढंग से उन्‍हें लागू करेगा।

अनुच्छेद 15 में धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध का जिक्र है, इसका अर्थ है कि राज्य के द्वारा धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग एवं जन्म-स्थान आदि के आधार पर नागरिकों के प्रति जीवन के किसी भी क्षेत्र में भेदभाव नहीं किया जाएगा। अनुच्छेद 21 में प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का सरंक्षण का जिक्र है। इसका मतलब है कि किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रकिया के अतिरिक्त उसके जीवन और वैयक्तिक स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है।

अंग्रेजी न्यूज चैनल टाइम्स नाउ से बातचीत में एक सवाल के जवाब में साल्वे ने कहा, ‘CAB मुस्लिम विरोधी नहीं है और ये संविधान के अनुच्छेद 14, 15 या 21 का भी उल्लंघन नहीं करता।’ उन्होंने कहा कि बिल अल्पसंख्यक समर्थक है। वो अल्पसंख्यक है जो हमारे पड़ोसी देश अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में रहते हैं। उन्होंने कहा कि ‘इन देशों के संविधान धर्म के आधार पर हैं। इसका मतलब यह नहीं की दूसरे समुदाय को नागरिकता नहीं दी जाएगी। बिल संविधान के अनुच्छेदों का उल्लंघन नहीं करता है। इसलिए मुझे नहीं लगता है कि इस बिल का इतना विरोध क्यों हो रहा है।’

उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन बिल (CAB) लोकसभा में पास होने के बाद से देश के पूर्वोत्तर राज्यों में इसका भारी विरोध हो रहा है। बिल के विरोध में असम, मणिपुर और त्रिपुरा में विभिन्न संगठनों ने बंद बुलाया और गैरआदिवासियों की दुकानों को आग लगा दी गई। लोकसभा ने सोमवार को इस विधेयक को पारित किया, जिसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए गैर मुस्लिम शरणार्थी – हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का पात्र बनाने का प्रावधान है।

बिल में मुस्लिम समुदाय को शामिल ना किए जाने पर विपक्ष ने इसे सीधे तौर पर संविधान का उल्लंघन बताया है। विपक्ष का कहना है कि संविधान धर्म के आधार पर कानून बनाने की इजाजत नहीं देता।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 आप लोगों पर आंच नहीं आने दूंगा, अपने ‘सेवक मोदी’ पर भरोसा रखें; असम हिंसा पर बोले PM
2 CAB: ‘बंगाल 2021’ के लिए बीजेपी कर रही तैयारी! जानें सूबे की राजनीति को क्यों बदलकर रख देगा नागरिकता संशोधन विधेयक
3 STATE BANK OF INDIA ने एनपीए में छिपाया 12 हजार करोड़ रुपये का कर्ज? सामने आए आंकड़े
ये पढ़ा क्या?
X