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‘मुस्लिमों पर अत्याचार बंद करें, फौरन लॉकडाउन खत्म करें’, SC के पूर्व जज ने पीएम मोदी को लिखी जवाबी चिट्ठी

काटजू ने चिट्ठी में लॉकडाउन का फैसला जल्दबाजी में लिए जाने का आरोप लगाया और लिखा कि 24 मार्च की रात साढ़े आठ बजे लॉकडाउन का ऐलान किया गया और लोगों को तैयारी के लिए सिर्फ साढ़े तीन घंटे का वक्त दिया गया।

markandey katjuजस्टिस काटजू ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर लॉकडाउन खत्म करने की भी मांग की है। (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस संकट के बीच शनिवार को देशवासियों के नाम एक खुला पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने देशवासियों को अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले साल की उपलब्धियां गिनायी थीं। अब इस पत्र के जवाब में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्केंडेय काटजू ने पीएम मोदी को एक जवाबी पत्र लिखा है। ‘द रेशनल डेली’ वेबसाइट पर छपे इस पत्र में काटजू ने लिखा है कि “आपकी नैतिकता और ईमानदारी पर मुझे कोई शक नहीं है, कोई भी आप पर निजी घोटाले का आरोप नहीं लगा सकता, जैसा कि यूपीए की सरकार में बड़े पैमाने पर हुआ, लेकिन मेरी आपसे तीन अपील हैं, जो कि मैं इस देश के लोगों की तरफ से आपसे करना चाहता हूं।”

लॉकडाउन को तुरंत खत्म करने की मांग कीः जस्टिस काटजू ने अपनी चिट्ठी में पीएम मोदी से लॉकडाउन को तुरंत खत्म करने की अपील की। उन्होंने लिखा कि “लॉकडाउन के चलते देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई है। करोड़ो लोगों की आजीविका चली गई है और वह भुखमरी के कागार पर आ गए हैं। प्रवासी मजदूरों का बड़ी संख्या में पलायन हो रहा है, जिसमें कई रास्ते में ही मर गए हैं।”

काटजू ने चिट्ठी में लॉकडाउन का फैसला जल्दबाजी में लिए जाने का आरोप लगाया और लिखा कि ’24 मार्च की रात साढ़े आठ बजे लॉकडाउन का ऐलान किया गया और लोगों को तैयारी के लिए सिर्फ साढ़े तीन घंटे का वक्त दिया गया। जिससे अव्यवस्था फैली।’

मुस्लिमों के खिलाफ अत्याचार बंद करने की मांगः काटजू ने देश में मुस्लिमों के खिलाफ हो रहे कथित अत्याचार को बंद करने की भी मांग की। उन्होंने लिखा कि इससे देश में अलगाव हो सकता है।

विपक्ष को साथ लेने की जरुरतः जस्टिस काटजू ने अपने पत्र में पीएम मोदी से संकट की इस घड़ी में विपक्ष को भी साथ लेने की अपील की। काटजू ने कहा कि अर्थव्यवस्था बुरे हालात में है और लॉकडाउन के चलते यह तेजी से नीचे की तरफ जा रही है। ऐसे मुश्किल वक्त में आपको राजनैतिक और वैचारिक मतभेद भुलाकर सभी को साथ लेना चाहिए। जिसमें विपक्षी पार्टियों के नेता, वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री, प्रशासक आदि को शामिल कर राष्ट्रीय सरकार बनानी चाहिए। ऐसे समय में पूरे देश को एकजुट रहना चाहिए।

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