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जस्टिस गांगुली ने कहा- गलत हैं राजस्थान के जज, मैने खुद सुनी है मोरनी को रिझाने वाली आवाज

जस्टिस गांगुली ने जस्टिस शर्मा की गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की सलाह को भी गलत बताया

जस्टिस एके गांगुली

गाय के मुद्दे पर छिड़ी बहस अब मोर पर जा पहुंची है। फिलहाल जो मुद्दा चर्चा में है वो ये कि क्या मोर सेक्स करता है। बुधवार को राजस्थान हाई कोर्ट के जज महेश चंद शर्मा ने कहा था कि मोर को राष्ट्रीय पक्षी इसलिए बनाया गया क्योंकि वह ब्रह्मचारी होता है। उनके इस बयान पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके गांगुली ने कहा कि यह दावा अनावश्यक और वैज्ञानिक तौर पर बिलकुल गलत है। News18 के मुताबिक, पश्चिम बंगाल मानवाधिकार के चेयरमैन भी रह चुके गांगुली ने कहा, “जब मैं सुप्रीम कोर्ट का जज था तब मैने दिल्ली की तुगलकाबाद रोड पर मादा को रिझा रहे मोर की आवाज सुनी थी।” जस्टिस गांगुली ने जस्टिस शर्मा की गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की सलाह को भी गलत बताया। उन्होंने कहा, “यह उनकी खुद की कल्पना है। गाय को राष्ट्रीय पशु बना देने का मतलब यह नहीं कि वह सुरक्षित हो गई। गोवध रोकने का यह कोई तरीका नहीं हो सकता। इसपर व्यापक विचार करने की जरूरत है, ना कि भावना से काम लेने की।”

बता दें कि बुधवार को जस्टिस शर्मा ने कोर्टरूम में कहा था कि गाय को राष्ट्रीय पशु बना देना चाहिए और गोकशी करने वालों की सजा उम्रकैद कर देनी चाहिए। इसके अलावा कोर्ट से बाहर जस्टिस शर्मा ने कहा था, ”जो मोर है, ये आजीवन ब्रह्मचारी है, कभी मोरनी के साथ सेक्स नहीं करता है, इसके जो आंसू हैं मोरनी उसे चुगकर गर्भवती होती है, और मोर या मोरनी को जन्म देती है।”

जज महेश चन्द्र शर्मा ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के पीछे अपना तर्क देते हुए कहा कि नेपाल एक हिन्दू देश है और वहां पर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया है। जबकि भारत एक कृषि प्रधान देश है और हमारी खेती जानवरों पर आधारित है। महेश चन्द्र शर्मा ने कहा कि संविधान की धारा 48 और 51 (जी) के मुताबिक राज्य सरकार से ये अपेक्षा की जाती है कि वो गाय को कानूनी संरक्षण दें।

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