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RBI के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने अरुण जेटली को तीन-तीन बार चेताया था- इलेक्टोरल बॉन्ड से बढ़ेगा भ्रष्टाचार, नोटबंदी का मकसद भी होगा फेल

आरबीआई को सीजीएम ने बजट पूर्व सलाह में वित्त मंत्रालय को इलेक्टोरल बॉन्ड के खिलाफ चेतावनी दी थी। पूर्व गवर्नर पटेल ने इस मामले में साल 2017 में जुलाई के अंत में जेटली से मुलाकात के बाद सीधे हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया था।

Author नई दिल्ली | Updated: November 21, 2019 7:48 AM
उर्जित पटेल ने साल ने पिछले साल 11 दिसंबर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। (File Photo)

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने इलेक्टोरल बॉन्ड और इसके प्रभाव को लेकर तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली को तीन बार चेताया था। उर्जित ने जेटली से कहा था कि इलेक्टोरल बॉन्ड के लाने से न सिर्फ भ्रष्टाचार बढ़ेगा बल्कि नोटबंदी का मकसद भी फेल हो जाएगा। यह बात टेलीग्राफ में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कही गई है।

रिपोर्ट के अनुसार उर्जित ने साल 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली को इस संबंध में तीन बार पत्र लिखा था। उर्जित ने कहा था कि केंद्रीय बैंक के अलावा किसी अन्य बैंक को इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने की अनुमति देने में खतरा है। इस पूरी कवायद से नोटबंदी से मिलने वाला फायदा खत्म हो जाएगा।

आरबीआई को सीजीएम ने बजट पूर्व सलाह में वित्त मंत्रालय को इलेक्टोरल बॉन्ड के खिलाफ चेतावनी दी थी। पूर्व गवर्नर पटेल ने इस मामले में साल 2017 में जुलाई के अंत में जेटली से मुलाकात के बाद सीधे हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया था। साल 2017 में अगस्त से सितंबर के दौरान वित्त मंत्रालय रिजर्व बैंक पर इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम का मसौदा  तैयार करने के लिए जोर डाल रहा था। उस दौरान ही पटेल ने वित्त मंत्रालय को ये तीन पत्र लिखे थे।

मालूम हो कि तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2017-18 के अपने बजट भाषण में इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम की घोषणा की थी। इससे पहले मीडिया में इस आशय की भी खबरें प्रकाशित हुई थी कि इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम की घोषणा से पहले विधि मंत्रालय और मुख्य चुनाव आयुक्त की तरफ से भी विरोध  जताया गया था।

विधि मंत्रालय को वित्त मंत्रालय की उस दलील पर आपत्ति थी जिसमें कहा गया था कि इस स्कीम को वही पार्टियां ले सकेंगी जिनकी लोकसभा या विधानसभा  चुनाव में कम से कम एक फीसदी वोट शेयर हो। विधि मंत्रालय इस वोट शेयर की शर्त को पूरी तरह से हटाने के पक्ष में था। वहीं मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने भी इस स्कीम को लेने के संबंध में वोट शेयर की शर्त को भेदभावपूर्ण बताया था। वहीं, इस संबंध में राजनीतिक दलों से कोई विचार विमर्श नहीं किया गया था।

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