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प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न की खबर पर बेहद नाराज थीं बेटी शर्मिष्ठा, पूर्व राष्ट्रपति ने आरएसएस मुख्यालय को बताया शेर की मांद!

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी अपने पिता को भारत रत्न दिए जाने की खबर को लेकर उनसे नाराज थी। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खुद को भारत रत्न पुरस्कार दिए जाने और आरएसएस मुख्यालय जाने से जुड़े वाकये को एक किताब के लिए दिए इंटरव्यू में बताया।

राष्ट्रपति ने इंटरव्यू में आपातकाल पर भी बात की। (फाइल फोटोः पीटीआई)

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी अपने पिता की तरफ से भारत मिलने से जुड़ी खबर नहीं बताने के लिए काफी नाराज थी। इस बात का खुलासा पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे प्रणब मुखर्जी ने एक किताब के लिए दिए इंटरव्यू में किया।

एनडीटीवी की सोनिया सिंह ने किताब ‘Defining India: Through Their Eyes’ के लिए इंटरव्यू में पूर्व राष्ट्रपति ने मोदी सरकार की तरफ से भारत रत्न दिए जाने से लेकर आरएसएस मुख्यालय से निमंत्रण और आपातकाल जैसे विभिन्न मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी।

भारत रत्न सम्मान मिलने के बारे में बातचीत करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने मेरी सहमति जानने के लिए 25 जनवरी को शाम 6 बजे फोन किया था। उन्होंने कहा, ‘सामान्य रूप से प्रधानमंत्री मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिलते और मेरी रजामंदी लेते लेकिन वह गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति की यात्रा के कारण व्यस्त थे।

हालांकि, प्रधानमंत्री चाहते थे कि भारत रत्न की घोषणा गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर ही हो और राष्ट्रपति को अधिसूचना जारी करने की सलाह से पहले उन्हें मेरी सहमति की जरूरत थी।’

राष्ट्रपति भवन की तरफ से घोषणा से पहले इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं देने की घटना को याद करके मुस्कुराते हुए प्रणब ने कहा, ‘पीएम मोदी ने मुझसे कहा कि राष्ट्रपति आपकी सहमति को लेकर मेरे फोन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।’ पूर्व राष्ट्रपति ने हंसते हुए बताया, ‘मेरी बेटी शर्मिष्ठा जो मेरे साथ रहती थी, मुझपर काफी गुस्सा हो गई।

उसने कहा, ‘आपको भारत रत्न दिया जा रहा है और आप ऐसे रिएक्ट कर रहे हैं जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो। आपने यहां तक कि मुझे भी नहीं बताया। उन्होंने बताया, ‘इस पर मैंने कहा कि मैं औपचारिक अधिसूचना का इंतजार कर रहा था। उसने गुस्से में कहा, ‘अधिसूचना क्या होती है, आपको इंतजार करने की क्या जरूरत थी, निश्चित रूप से जब प्रधानमंत्री ने फोन किया था तो इसमें कोई शक ही नहीं रह जाता है।’

आरएसएस मुख्यालय को बताया शेर की मांदः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय जाने के बारे में पूछने पर प्रणब ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘मैं शेर की मांद में जाना चाहता था और उन्हें दिखाना चाहता था कि वे गलत कर रहे हैं।’ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 6 जून 2018 को नागरपुर में संघ मुख्यालय की बैठक को संबोधिक किया था।

उन्होंने संघ के कार्यक्रम में कहा था, ‘सहिष्णुता हमारी मज़बूती है। हमने बहुलतावाद को स्वीकार किया है और उसका आदर करते हैं. हम अपनी विविधता का उत्सव मनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि हम सहमत हो सकते हैं, असहमत हो सकते हैं, लेकिन हम वैचारिक विविधता को दबा नहीं सकते।

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