मनमोहन की मोदी से अपीलः आंकड़ेबाजी की बजाए ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाने की व्यवस्था करे सरकार

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लिखा है कि सरकार को यह बताना चाहिए कि इन टीकों का वितरण राज्यों के बीच किस तरह के फॉर्मूले के आधार पर किया जाएगा।

manmohan singh, congress, bjpपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सुझाव दिया है कि जिन वैक्सीन को अन्य विकसित देशों में मंजूरी मिल चुकी है उन्हें बिना किसी ट्रायल के टीकाकरण अभियान में शामिल करना चाहिए। (एक्सप्रेस फोटो:प्रेम नाथ पांडेय)

कोरोना के बढ़ते संक्रमण और उसकी वजह से वेंटिलेटर पर जा पहुंची देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता जाहिर करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है। मनमोहन सिंह ने इस चिट्ठी में अपने पांच सुझाव भेजे हैं और साथ ही टीकाकरण अभियान को लेकर कुछ सलाह भी दी है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि जिन वैक्सीन को अन्य विकसित देशों में मंजूरी मिल चुकी है उन्हें बिना किसी ट्रायल के टीकाकरण अभियान में शामिल करना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा लोगों का टीकाकरण किया जाना चाहिए।

मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी में पांच सुझाव दिए हैं। अपने पहले सुझाव में मनमोहन सिंह ने लिखा है कि सरकार को लोगों को यह बताना चाहिए कि किन वैक्सीन उत्पादकों को कितने डोज के ऑर्डर दिए गए हैं और अगले छह महीने के लिए वैक्सीन की सप्लाई के लिए कितने ऑर्डर स्वीकार किए गए हैं। साथ ही मनमोहन सिंह ने लिखा है कि अगर हमें छह महीनों के अंदर किसी निश्चित जनसंख्या को वैक्सीन लगाना है तो इसके लिए हमें वैक्सीन के एडवांस आर्डर देने चाहिए ताकि टीकाकरण में कोई दिक्कत ना हो। 

साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री ने यह भी लिखा है कि सरकार को यह बताना चाहिए कि इन टीकों का वितरण राज्यों के बीच किस तरह के फॉर्मूले के आधार पर किया जाएगा। केंद्र सरकार को 10 फीसदी टीका अपने पास रख लेना चाहिए लेकिन बाकी टीकों को लेकर राज्यों को पूरी जानकारी देनी चाहिए ताकि टीकाकरण अभियान में किसी भी तरह की समस्या ना हो।

इसके अलावा मनमोहन सिंह ने केंद्र से कहा है कि राज्यों को ही फ्रंटलाइन वर्कर्स की कैटेगरी तय करने का अधिकार दिया जाना चाहिए ताकि उनकी उम्र 45 साल से कम होने के बावजूद टीका लगाया जा सके।

इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी चिट्ठी में निजी क्षेत्र के वैक्सीन उत्पादकों को छूट और आर्थिक मदद करने का भी सुझाव दिया है। पूर्व पीएम ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि पिछले कुछ दशकों से भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक बनकर उभरा है। साथ ही उन्होंने लिखा कि अधिकांश क्षमताएं निजी क्षेत्र में ही है। इसलिए इन्हें सहूलियतें और रियायतें देनी चाहिए ताकि वैक्सीन की आपूर्ति ठीक ढंग से हो सके। इसके अलावा मनमोहन सिंह ने लिखा कि आपातकालीन स्थिति को ध्यान में रखते हुए अमेरिका और यूरोप में मंजूर कोरोना वैक्सीन को बिना किसी ट्रायल के टीकाकरण अभियान में शामिल कर देना चाहिए।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पत्र में कोरोना महामारी की वजह से देश में आए संकट पर भी चिंता जाहिर की। मनमोहन सिंह ने लिखा कि कोरोना महामारी की वजह से पिछले एक साल में हजारों लोगों की नौकरियां चली गई। लाखों लोगों गरीबी रेखा के नीचे चले गए। सब लोग स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं. इसलिए कोरोना से लड़ने के लिए हमें कई चीजों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। साथ ही टीकाकरण अभियान को तेज करने की जरुरत है। इसके अलावा मनमोहन सिंह ने यह भी लिखा कि मुझे उम्मीद है कि मेरे सुझावों पर अमल होगा।

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