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कर्नाटकः पूर्व PM देवगौड़ा को मानहानि के मामले में अदा करने होंगे 2 करोड़, उधर, UAPA में अखिल गोगोई बरी

जनता दल (सेकुलर) प्रमुख ने एनआईसीई परियोजना पर निशाना साधा था और उसे ‘लूट’ बताया था। अदालत ने कहा कि जिस परियोजना पर सवाल किए गए, उसे कर्नाटक उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने अपने निर्णयों में बरकरार रखा है।

Edited By Sanjay Dubey बेंगलुरु | Updated: June 23, 2021 6:29 PM
असम के सामाजिक कार्यकर्ता और शिवसागर विधायक अखिल गोगोई और पूर्व पीएम देवेगौड़ा। (फोटो पीटीआई फाइल)

कर्नाटक में बेंगलुरु की एक अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा को 10 साल पहले एक टेलीविजन साक्षात्कार में नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइजेज (एनआईसीई) के खिलाफ “अपमानजनक बयान” के लिए कंपनी को हर्जाने के रूप में दो करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। आठवें नगर दीवानी एवं सत्र न्यायाधीश मल्लनगौडा ने एनआईसीई द्वारा दायर मुकदमे पर यह निर्देश दिया है। कंपनी के प्रवर्तक और प्रबंध निदेशक अशोक खेनी हैं, जो बीदर दक्षिण के पूर्व विधायक हैं।

एक कन्नड़ समाचार चैनल पर 28 जून 2011 को प्रसारित साक्षात्कार का उल्लेख करते हुए, अदालत ने अपमानजनक टिप्पणियों के कारण कंपनी की प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के लिए देवेगौड़ा को कंपनी को दो करोड़ रुपये का हर्जाना देने का निर्देश दिया है। जनता दल (सेकुलर) प्रमुख ने एनआईसीई परियोजना पर निशाना साधा था और उसे ‘लूट’ बताया था। अदालत ने कहा कि जिस परियोजना पर सवाल किए गए, उसे कर्नाटक उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने अपने निर्णयों में बरकरार रखा है। अदालत ने 17 जून के अपने फैसले में कहा कि कंपनी की परियोजना बड़ी है और कर्नाटक के हित में है।

अदालत ने कहा, “अगर भविष्य में इस तरह के अपमानजनक बयान देने की अनुमति दी जाती है, तो निश्चित रूप से, कर्नाटक राज्य के व्यापक जनहित वाली इस जैसी बड़ी परियोजना के कार्यान्वयन में देरी होगी।” उसने कहा, “अदालत को लगता है कि प्रतिवादी के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा जारी करके ऐसे बयानों पर अंकुश लगाना जरूरी है।”

उधर, राष्ट्रीय जांच एजेंसी की अदालत ने असम में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन मामले में सिवसागर के विधायक अखिल गोगोई के खिलाफ गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम)अधिनियम (UAPA) 1967 के तहत दर्ज दो मामलों में से एक में उन्हें आरोपों से बरी कर दिया है। विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रांजल दास ने गोगोई के खिलाफ आरोप तय नहीं किये। गोगोई को दिसंबर 2019 में चाबुआ पुलिस थाने में दर्ज मामले में गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने गोगोई के दो सहयोगियों — जगजीत गोहेन एवं भूपेन गोगोई — को भी मामले में गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के सभी आरोपों से बरी कर दिया।

रायजोर दल के अध्यक्ष गोगोई को चाबुआ पुलिस थाने में दर्ज मूल मामले में इससे पहले जमानत मिल गयी थी। यह मामला बाद में एनआईए को सौंप दिया गया था। गोगोई के खिलाफ एनआईए दो मामलों की जांच कर रहा है, जो शुरूआत में चांदमारी एवं चाबुआ पुलिस थानों में दर्ज कराए गए थे। यह मामला हिंसक प्रदर्शन में गोगोई एवं उसके तीन अन्य साथियों की कथित भूमिका के लिये दर्ज किया गया था।

गोगोई के तीसरे सहयोगी भास्करज्योति फुकन के खिलाफ आरोप तय किए गए, लेकिन ये आरोप यूएपीए के तहत नहीं बल्कि भारतीय दंड संहिता की धारा 144 (घातक हथियारों से लैस होकर गैरकानूनी तरीके से एकत्रित होना) के तहत तय किये गये हैं। इस मामले को डिब्रूगढ़ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है।

एनआईए अदालत ने मंगलवार को चांदमारी थाने के उस मामले में भी सुनवाई की जो जांच एजेंसी को स्थानांतरित किया गया था। चांदमारी पुलिस थाने में दर्ज मामले में अदालत ने पिछले साल अगस्त में उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी, इसके बाद उसने इस फैसले को गुवाहाटी उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
उच्च न्यायालय में जमानत की अर्जी खारिज हो जाने के बाद गोगोई ने उच्चतम न्यायालय का रूख किया। उच्चतम न्यायालय ने इस स्तर पर इस अर्जी पर विचार करने से इंकार कर दिया। गोगोई को 12 दिसंबर 2019 को जोरहाट से गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान प्रदेश में संशोधित नागरिकता अधिनियम का विरोध पूरे जोरों पर था। गोगोई की गिरफ्तारी कानून व्यवस्था के मद्देनजर एहतियात के तौर पर हुयी थी और इसके अगले दिन उसके तीन सहयोगियों को हिरासत में लिया गया था।

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