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राफेल पर बोले SC के पूर्व जज- ‘फेक है हमारी मिलिट्री’, अमेरिका, चीन की तरह आत्मनिर्भर नहीं

अपने लेख की शुरुआत में काटजू ने राजनाथ सिंह द्वारा राफेल की पूजा करने पर भी टिप्पणी की है। उन्होंने भारत और फ्रांस के बीच राफेल जेट लड़ाकू सौदे पर हुए विवाद का भी हवाला दिया है।

Author Published on: October 9, 2019 3:52 PM
SC के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः जयपाल सिंह)

आखिरकार लंबे इंतजार और ढेर सारे विवाद के बाद फ्रांस द्वारा निर्मित ‘राफेल लड़ाकू’ विमान मिल ही गया। शस्त्र-पूजन के साथ ही देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दसॉल्ट कंपनी से यह पहला सुपर फाइटर जेट हासिल किया। विमान को लेकर एक तरफ जहां भारतीय एयरपोर्स की ताकत में इजाफे की बात हो रही है, वहीं एक तबका इस विमान के आगमन पर हो रही चर्चाओं पर तीखी टिप्पणी भी कर रहा है। पंजाब टुडे में छपे एक लेख में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मारकंडे काटजू ने राफेल को लेकर चल रही चर्चाओं को बेवजह करार दिया है। उन्होंने भारत की सामरिक क्षमता को ‘फर्जी’ बताते हुए अमेरिका और चीन इसकी तुलना की है और कहा है कि हमारी मिलिट्री इन देशों की तरह आत्मनिर्भर नहीं है।

अपने लेख में पूर्व जस्टिस कहते हैं, “मैं अपनी बात रखना चाहूंगा कि एक ऐसा सैनिक जिसका देश अपना हथियार नहीं बना सकता, वह एक नकली सैनिक है। वास्तव में सैनिक नहीं है और उस दृष्टिकोण से भारतीय सेना नकली है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका या चीन जैसी वास्तविक सेना नहीं है। लिहाजा, यह सिर्फ पाकिस्तान की जैसी और नकली सेना से लड़ सकती है।” काटजू कहते हैं, “आजादी के 72 साल बाद भी भारत हथियार नहीं बना सकता है, लेकिन विदेशों से (भारी खर्च पर) अपने सैन्य, लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों, तोपखाने, टैंकों, मिसाइलों आदि जैसे भारी हथियार ही नहीं बल्कि काई सारी राइफलें भी खरीदता है। साल के शुरुआत में खबर आई थी कि भारत सरकार अमेरिका से 700 करकोड़ रुपये में 72,400 असॉल्ट राइफलें खरीद रहा है। यानी हम राइफल भी नहीं बना सकते हैं।”

अपने लेख की शुरुआत में काटजू ने राजनाथ सिंह द्वारा राफेल की पूजा करने पर भी टिप्पणी की है। उन्होंने भारत और फ्रांस के बीच राफेल जेट लड़ाकू सौदे पर हुए विवाद का भी हवाला दिया है। साथ ही अनिल अंबानी पर भी निशाना साधा है और कहा है कि जिन्हें एयरक्राफ्ट बनाने का अनुभव नहीं था, उन्हें कॉन्टैक्ट दे दिया गया।

आगे काटजू अपने लेख में कहते हैं, “आधा दर्जन अमेरिकी एफ -15 विमान शायद हमारी पूरी वायु सेना को नष्ट कर सकते हैं और संभवतः हमारे पूरे तोपखाने, टैंक और मिसाइल भी। सैन्य शक्ति आर्थिक शक्ति से आती है। यह केवल अत्यधिक औद्योगिक देश हैं जो अपने हथियार बना सकते हैं, जबकि भारत जैसे विकसशील देशों को खरीदना पड़ता है। इसलिए यदि भारत को अपने हथियार बनाने हैं तो उसे अत्यधिक औद्योगिक होना चाहिए।”

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