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भारतीय वायुसेना के रिटायर CBR प्रसाद ने रक्षा मंत्रालय को दान कर दी जिंदगी भर की बचत

74 साल के प्रसाद पशुपालन करते हैं। वे पोल्ट्री फॉर्म भी चलाते हैं। अपने जीवन भर की कमाई उन्होंने 1.08 करोड़ रुपए संचित की थी, जिसे सैन्य बलों को दान करने का उन्होंने फैसला किया। वे बताते हैं, ‘वायुसेना में नौ साल तक काम करने के बाद मुझे भारतीय रेलवे से अच्छी नौकरी का प्रस्ताव आया। मैंने वायुसेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली, लेकिन रेलवे की भी नौकरी नहीं मिली। ऐसे में अपनी जीविका चलाने के लिए खेती-बाड़ी के अलावा पोल्ट्री फॉर्म का काम शुरू किया।’ प्रसाद सोमवार को जाकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिले और उन्हें ही चेक सौंपा।

भारतीय वायुसेना से 40 साल पहले रिटायर हुए 74 साल के सीबीआर प्रसाद ने मंगलवार को अपने जीवन की पूरी बचत-कमाई रक्षा मंत्रालय को दान कर दी।

भारतीय वायुसेना से 40 साल पहले रिटायर हुए 74 साल के सीबीआर प्रसाद ने मंगलवार को अपने जीवन की पूरी बचत-कमाई रक्षा मंत्रालय को दान कर दी। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की और उन्हें 1.08 करोड़ रुपए का चेक सौंपा। प्रसाद ने कहा, ‘परिवार के प्रति सभी जिम्मेदारियां पूरी करने के बाद मुझे लगा कि सैन्य बलों और समाज के लिए कुछ करना चाहिए। मुझे वायुसेना ने जो दिया, उसे और समाज को वापस लौटाने की छोटी सी यह कोशिश है।’

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक, वायुसेना में बतौर एअरमैन नौ साल तक काम कर रिटायर होने वाले सीबीआर प्रसाद के जज्बे की रक्षा मंत्री ने तारीफ की। प्रवक्ता ने कहा, ‘रक्षा मंत्री के मुताबिक यह जज्बा काबिले तारीफ था कि सैन्य बलों का अदना सा एक सिपाही भी समाज को वापस लौटाने की मंशा रखता है।’ क्या परिवार इस फैसले पर आसानी से राजी हो गया था? इस सवाल पर प्रसाद ने कहा, ‘बिल्कुल, किसी को कोई समस्या नहीं थी। मैंने अपनी संपत्ति का दो फीसद बेटी और एक फीसद पत्नी को दिया है। बाकी 97 फीसद कमाई या बचत दान की है। मेरे लिए यह समाज को वापस लौटाने जैसा है।’ प्रसाद ने बताया कि किसी वक्त में उनकी जेब में सिर्फ पांच रुपए थे।

उनके पास 500 एकड़ जमीन है, जिसमें पांच एकड़ उन्होंने पत्नी और 10 एकड़ बेटी को दी है। पूर्व वायुसेना कर्मी प्रसाद के मुताबिक, वे देश के लिए खेलकर ओलिंपिक मेडल जीतना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अब वे अपने सपने को देश के बच्चों से पूरा होता चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने 50 एकड़ जमीन पर दो खेल विश्वविद्यालय खोले हैं। वहां वे खुद भी प्रशिक्षण देते हैं।

दान की प्रेरणा के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘20 साल का था, तब मैं वायुसेना में काम कर रहा था। एक दिन मेरे अधिकारियों ने कोयंबटूर से जीडी नायडू नाम के एक शख्स को एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बुलाया था। उन्होंने बताया कि हमारा देश महान था क्योंकि हमारे साधु-संतों ने बताया कि हमें समाज से जितना मिलता है उतना ही हमें वापस देना चाहिए। वह बात मेरे मन में घर कर गई थी।’

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