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स्वादिष्ट अमृतसरी छोले कुलचे के शौकीन थे अरुण जेटली, खुद बनाकर दोस्तों को परोसते थे ये लजीज व्यंजन

Arun Jaitley Death Latest News: पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम के मुताबिक जेटली खाने-पीने के शौकीन थे और सहयोगियों को भी खिलाया-पिलाया करते थे।

Author नई दिल्ली | Updated: August 24, 2019 1:04 PM
पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली। फोटो: PTI

Arun Jaitley Death News: बीजेपी के वरिष्ठ नेता और एनडीए सरकार में मंत्री रहे अरुण जेटली नहीं रहे।  शनिवार को एम्स में उनका निधन हो गया। उनकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी। एम्स में उन्हें देखने के लिए कई राजनेता पहुंचे थे।

वह पार्टी के बड़े रणनीतिकार रहे हैं। पार्टी या सरकार पर संकट की घड़ी में अक्सर उन्हें आगे आकर मोर्चा संभालते हुए देखा गया है। वो अपने राजनीतिक कौशल से विरोधियों को भी दोस्त बनाने की कला में माहिर थे। जेटली को अमृतसरी छोले-कुलचे बहुत पसंद थे। वो न सिर्इ इस व्यंजन के शौकीन थे बल्कि खुद इसे बनाने में भी उस्ताद थे। जब कोई दोस्त या करीबी उनके घर जाता था, तब जेटली उन्हें अपने हाथों से बने छोले-कुलचे से उनकी आवभगत किया करते थे।

मोदी सरकार-1 में जेटली वित्त मंत्री थे। बतौर वित्त मंत्री जेटली ने दो मोर्चों (नोटबंदी और जीएसटी) पर मजबूती से डटकर सामना किया और हरसंभव कोशिश की कि देश की आर्थिक गति पटरी पर आए। हालांकि, उनके पास जीएसटी काउंसिल में भी बहुमत था लेकिन उन्होंने हमेशा जीएसटी काउंसिल में फैसले आम सहमति से लिया। जेटली विरोधियों की बात भी बड़ी गंभीरता से सुनते थे। जेटली ने हमेशा जीएसटी की तारीफ की और कहा कि एक देश एक टैक्स ही भारत के लिए श्रेष्ठकर है।

पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम के मुताबिक जेटली खाने-पीने के शौकीन थे और सहयोगियों को भी खिलाया-पिलाया करते थे। उन्होंने बताया, “एक बार कुछ पत्रकार उनके घर पर आर्थिक विषय पर चर्चा के लिए आए थे, तब उन्होंने मुझे भी बुलाया था। आने के थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या आपने पहाड़गंज का छोला-भटूरा कभी खाया है? मैंने कहा, नहीं। तब उन्होंने कहा था कि बहुत स्वादिष्ट होता है और मैंने आपके लिए भी मंगवाया है। पहले खाते हैं, फिर इंटरव्यू देते हैं।”

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास जो पहले वित्त सचिव थे, ने भी जेटली की तारीफ करते हुए उन्हें सबको साथ लेकर चलने वाला नेता करार दिया। दास के मुताबिक, “वह एक महान टीम लीडर थे जो नौकरशाही को बहुत जगह देते थे। अत्यधिक ज्ञानवान थे और किसी भी मुद्दे या विषय पर संवाद करने और उसपर रणनीति बनाने से लेकर संसद में उसे पेश करने में उस्ताद थे।”

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