1984 Anti Sikh Riots Sajjan Kumar Death: कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन हो गया है। सज्जन कुमार 1984 में दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगों के मामले में दोषी थे। सज्जन कुमार तीन बार बाहरी दिल्ली सीट से सांसद रहे थे।
सज्जन कुमार की उम्र 80 साल थी। वह इन दिनों सिख विरोधी दंगों के मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे थे। सज्जन कुमार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सज्जन कुमार दिल्ली की राजनीति में बड़ा नाम थे। 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े कई मामलों में उन पर हिंसा भड़काने, भीड़ को उकसाने और हत्या सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए थे।
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के थे दंगे
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर, 1984 को उनके सिख अंगरक्षकों- सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने हत्या कर दी थी। इंदिरा गांधी की हत्या किए जाने के बाद दिल्ली में दंगे भड़क गए थे। दिल्ली के कई इलाकों में आगजनी, हत्या और लूट की घटनाएं सामने आईं।
पूरी दिल्ली में सिखों को निशाना बनाया गया और भीड़ ने उनके घरों और दुकानों पर हमला किया। पूरे देश में 3,000 से ज्यादा सिखों की हत्या हुई, जिनमें से अधिकांश दिल्ली में मारे गए।
सज्जन कुमार को सिख विरोधी दंगों से जुड़े कुछ मामलों में बरी कर दिया गया था जबकि कुछ में दोषी ठहराया गया।
दिसंबर, 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट ने 2013 में ट्रायल कोर्ट द्वारा सज्जन कुमार को बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया था। इसके बाद उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था।
क्या था यह मामला?
यह मामला पालम कॉलोनी के राज नगर पार्ट-I में सिख समुदाय के पांच लोगों की हत्या और इसके बाद फैली हिंसा के दौरान एक गुरुद्वारे को जलाए जाने से संबंधित था। हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार को आपराधिक साजिश रचने और हिंसा के लिए उकसाने का दोषी पाया था। अदालत ने निर्देश दिया था कि उन्हें उनके जीवन के बाकी समय तक जेल में ही रखा जाए।
अदालत ने अपने फैसले में 1984 के सिख विरोधी दंगों को मानवता के खिलाफ अपराध बताया था।
दो मामलों में कर दिया था बरी
इस साल जनवरी में दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के दंगों के दौरान जनकपुरी और विकासपुरी के इलाकों में हिंसा भड़काने के आरोपों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में सज्जन कुमार को बरी कर दिया था। इन मामलों में बरी होने के बावजूद कुमार को रिहा नहीं किया गया क्योंकि अन्य मामलों में मिली उम्रकैद की सजा के कारण वे जेल में ही रहे।
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31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उन्हीं के अंगरक्षकों ने गोली मारकर हत्या कर दी। इंदिरा की हत्या के बाद दिल्ली समेत पूरे देश में सिख विरोधी दंगे शुरू हो गए। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
