Former CJI BR Gavai Met Dhirendra Shastri: देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई ने बीते सोमवार को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध बागेश्वर धाम में बालाजी के दर्शन किए थे। इस दौरान पूर्व सीजेआई के साथ उनकी धर्मपत्नी तेजस्वनी गवई और पुत्र ज्योतिरादित्य गवई भी मौजूद थे। इस दौरान पूर्व सीजेआई गवई ने परिवार के साथ बालाजी के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री से भी मुलाकात की। इस मौके पर धाम में आध्यात्म और सामाजिक सेवा के कार्यों पर विशेष चर्चा हुई।

जानकारी के मुताबिक, पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ग्राम गड़ा स्थित बागेश्वर धाम पहुंचे थे। यहां उन्होंने पूरे श्रद्धा भाव से बागेश्वर बालाजी भगवान के दर्शन किए थे। पंडितों द्वारा विधिवत पूजन-अर्चन भी कराया गया। दर्शन के बाद बीआर गवई ने बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर सरकार) से मुलाकात की और आशीर्वाद लिया।

सनातन को मजबूत करने के प्रयास सराहनीय- पूर्व सीजेआई

बीआर गवई ने कहा कि बागेश्वर धाम में सनातन संस्कृति को मजबूत करने के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं, वे सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े सामाजिक कार्य निरंतर चलते रहें, तो भारत को विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। कैंसर

हॉस्पिटल का किया जिक्र

इस मौके पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने बागेश्वर धाम में संचालित कैंसर हॉस्पिटल का भी जिक्र किया और वहां की स्वास्थ्य सेवाएं भी देखीं। उन्होंने इस पहल को समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। इसके साथ ही धाम द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक और धार्मिक प्रकल्पों की भी सराहना की।

प्रशांत भूषण ने उठाए सवाल

सोमवार को धीरेंद्र शास्त्री से बीआर गवई की मुलाकात को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “मुझे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा! पूर्व मुख्य न्यायाधीश गावई एक नफरत फैलाने वाले धोखेबाज के साथ! वह न्यायपालिका को किस तरह का संदेश दे रहे हैं! चौंकाने वाला!

पूर्व CJI की टिप्पणी पर हुआ था विवाद

सितंबर 2025 में खजुराहो के मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की पुनर्स्थापना की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन सीजेआई बी.आर. गवई ने सुनवाई की थी। उन्होंने इस पर टिप्पणी की थी और कहा, “यदि आप भगवान विष्णु के भक्त हैं, तो मूर्ति ठीक करने के लिए उनसे ही प्रार्थना करें।” इस व्यंग्यात्मक टिप्पणी को हिंदू आस्था के अपमान के रूप में देखा गया, जिससे सोशल मीडिया पर भारी विरोध हुआ था।

सीजेआई बीआर गवई की इस टिप्पणी पर कई हिंदू संगठनों ने भी विरोध जताया था। इस पर सीजेआई गवई ने बाद में स्पष्ट किया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया और वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि सोशल मीडिया पर बातों को गलत तरीके से पेश किया गया।

इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए नाबालिग बाध्य नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नाबालिग लड़की को सात महीने से अधिक की गर्भावस्था का चिकित्सीय समापन कराने की अनुमति देते हुए कहा कि कोई भी अदालत किसी महिला, विशेषकर नाबालिग को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था पूरी अवधि तक जारी रखने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। पढ़िए पूरी खबर…