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640 करोड़ के PWD Scam में पूर्व चीफ सेक्रेटरी गिरफ्तार, दो राज्यों की पुलिस ने मिल कर पकड़ा

लेफ्ट के सत्ता से जाने और भाजपा की सरकार बनने के बाद 2008 और 2018 के बीच सभी परियोजनाओं के कार्यान्वयन में एक आंतरिक जांच शुरू की गई थी।

640 करोड़ के घोटाले के आरोप में त्रिपुरा के पूर्व चीफ सेक्रेटरी को गिरफ्तार किया गया है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

त्रिपुरा के पूर्व मुख्य सचिव यशपाल सिंह को करोड़ों रुपये के पीडब्ल्यूडी घोटाले के सिलसिले में सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें दो राज्यों की पुलिस द्वारा एक संयुक्त अभियान में इंदिरापुरम में एक दोस्त के घर से गिरफ्तार किया गया है। सिंह को मंगलवार को गाजियाबाद कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा और फिर सुनवाई के बाद ट्रांजिट रिमांड पर अगरतल्ला ले जाया जाएगा। त्रिपुरा पुलिस ने कहा कि पूर्व नौकरशाह पिछले दो दिनों से दोस्त के घर पर छिपे हुए थे।

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, सिंह को 640 करोड़ रुपये के घोटाले में प्राथमिकी दर्ज करने के लगभग चार महीने बाद गिरफ्तार किया गया है। वह 2008 और 2009 के बीच त्रिपुरा में पूर्ववर्ती लेफ्ट फ्रंट की सरकार के दौरान पीडब्ल्यू विभाग में चीफ सेक्रेटरी थे और उन पर सरकारी परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी करने की प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप है।

सूत्रों ने बताया कि सिंह ने पीडब्ल्यूडी की परियोजनाओं को निजी ठेकेदारों को पैसे लेकर दिया था। वह उस समय प्रिंसिपल सेक्रेटरी थे, लेकिन राज्य सरकार के चीफ सेक्रेटरी के रूप में रिटायर हुए।

इस मामले की जांच कर रहे अधिकारी अजय दास ने कहा, “2008-09 में आरोपी ने प्राइवेट ठेकेदारों को 13 प्रोजेक्ट दिए। इसमें पांच पुल, पांच इमारतों और तीन सड़कों का काम शामिल था। इसके लिए 638 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।”

लेफ्ट के सत्ता से जाने और भाजपा की सरकार बनने के बाद 2008 और 2018 के बीच सभी परियोजनाओं के कार्यान्वयन में एक आंतरिक जांच शुरू की गई थी। पीडब्ल्यूडी की निगरानी टीम द्वारा एक जांच रिपोर्ट दी गई थी, जिसमें सिंह, चौधरी और भौमिक के खिलाफ पुलिस शिकायत भी दर्ज की गई थी।

सिंह के पुलिस से बच निकलने के बाद त्रिपुरा के पूर्व मंत्री और सीपीएम के दिग्गज बादल चौधरी और पूर्व पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता सुनील भौमिक को मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया। वे फिलहाल जमानत पर हैं।

त्रिपुरा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस मामले की प्राथमिकी पिछले साल 13 अक्टूबर को दर्ज की गई थी। उन्होंने आगे कहा, “घोटाले में अपना नाम आने का पता चलने के बाद से हीं सिंह फरार थे। हम पिछले चार महीनों से उनका नंबर पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वह अपना नंबर और स्थान बदलता रहा। किसी तरह हम उसके नए नंबर को ट्रैक करने में कामयाब रहे और उसे इंदिरापुरम में एक दोस्त के घर से गिरफ्तार कर लिया।”

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