वृद्धाश्रम में बीता टीएन शेषन का जन्मदिन, लालू ने कहा था- भैंसिया पे चढ़ा के गंगाजी में हेला देंगे

एक वक्त ऐसा था जब देशभर के नेता टीएन शेषन से खौफ खाते थे। शेषन थोड़ी भी गड़बड़ होने पर चुनाव रद्द कर देते थे और अधिकारियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता था। 

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन। ( फोटो सोर्स : Indian Express Archive)

भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन आज (15 दिसंबर) 86 वर्ष के हो गए हैं। उनका जन्मदिन चेन्नई के एक वृद्धाश्रम में गुजरा। शेषन साल 1990 से 1996 तक देश के चीफ इलेक्शन कमिश्नर रहे। अपने कार्यकाल में उन्होंने चुनावी प्रक्रियाओं में जबर्दस्त सुधार किया। देश में निष्पक्ष चुनाव के लिए शेषण ने चुनाव आयोग के इतिहास में लंबी लकीर खींची है। जन्मदिन के मौके पर उन्हें याद रखने वालों ने बधाई भी दी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने टीएन शेषन को जन्मदिन की बधाई देते हुए लिखा है, “टीएन शेषन को जन्मदिन की बधाई। मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में चुनावी सुधार प्रक्रियाओं को लेकर किए गए उनके कार्य हमेशा याद किए जाएंगे। हमारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस हमेशा से ही चुनाव प्रक्रिया में सुधार की मांग करती रही है।”

पिछले साल सोशल मीडिया पर टीएन शेषन की एक तस्वीर वायरल हुई थी। वह तस्वीर चेन्नई के एक ओल्ड एज होम की थी जहां उनका बुढ़ापा गुजर रहा है। शेषन की याद्दाश्त भी अब कमजोर पड़ चुकी है। एक वक्त ऐसा था जब देशभर के नेता टीएन शेषन से खौफ खाते थे। उन्होंने शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिए यूपी-बिहार जैसे राज्यों में पैरा मिलिट्री फोर्सेज तैनात करवा कर चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा पहरा लगवा दिया था। 1995 के बिहार विधान सभा चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए तो उन्होंने चुनाव की तारीखें चार बार आगे बढ़वा दी थीं। वो चुनाव प्रचार के दौरान जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते थे। बड़े से बड़े और कद्दावर नेता को भी चुनाव प्रचार की सीमा खत्म होने के बाद सभा नहीं करने दी थी।

शेषन थोड़ी भी गड़बड़ होने पर चुनाव रद्द कर देते थे और अधिकारियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता था। संकर्षण ठाकुर अपनी किताब- ‘द ब्रदर्स बिहारी’ में लिखते हैं, “1995 के चुनाव के दिनों में लालू अपने जनता दरबार में शेषन को जमकर लानतें भेजते। वो अपने ही अंदाज में कहते- शेषनवा को भैंसिया पे चढ़ाकर के गंगाजी में हेला देंगे।” चुनाव सुधार पर बीते दिनों ही सुप्रीम कोर्ट ने भी शेषन का नाम लेकर टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि टीएन शेषन के कार्यकाल में जो विश्वसनीयता थी उसको बनाए रखा जाए। शेषन के बाद चीफ इलेक्शन कमिश्नर का पद संभालने वाले वीएस संपथ का उनके बारे में कहना है, ‘उन्होंने चुनाव आयोग का जो रुतबा कायम किया वो आज भी बरकरार है।

शेषन को 1996 में रमन मैग्सेसे अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था। 1955 बैच के तमिलनाडु कैडर के आईएएस अधिकारी टीएन शेषन ने कई अहम पदों पर अपनी भूमिका निभाई है। वो सबसे कम समय तक कैबिनेट सेक्रेटरी बनने वाले अधिकारी रहे हैं। उन्होंने 1997 में के आर नारायणन के खिलाफ राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ा था। इसके अलावा वो लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल सकी।

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