भारतीय सेना के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान (रिटायर्ड) ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक बड़ी बात कही है। जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सरगोधा में कई ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ भेजे थे।
जनरल चौहान ने कहा कि हो सकता है कि उनमें से कोई एक किराना हिल्स की पहाड़ियों से टकरा गया हो।
जनरल चौहान ने कहा कि कई बार यह सवाल पूछा गया है कि क्या किराना हिल्स पर हमला हुआ था या नहीं। चौहान ने कहा कि उस समय DG एयर (ऑपरेशंस) एयर मार्शल ए.के. भारती ने साफ किया था कि भारत ने किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया था।
क्या है किराना हिल्स?
किराना हिल्स विशाल चट्टानों वाली पहाड़ियां हैं और यह पाकिस्तान के सरगोधा जिले में है। स्थानीय भाषा में इसे ब्लैक माउंटेन कहा जाता है। किराना हिल्स का इलाका रबवाह और सरगोधा शहर के बीच में फैला हुआ है।
भारत और पाकिस्तान के बीच बीते साल कुछ दिनों तक चले जबरदस्त सैन्य टकराव के दौरान यह चर्चा भी हुई थी कि क्या भारत ने पाकिस्तान के किराना हिल्स में स्थित परमाणु संयंत्र यानी न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया है। अब इस मामले में जनरल चौहान ने अपनी बात सामने रखी है।
जनरल चौहान के मुताबिक, भारत ने पाकिस्तान में जो ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ भेजे थे, उनका मकसद के सरगोधा और इसके आसपास के इलाके में रडार की तलाश करना था। उन्होंने बताया कि किराना हिल्स सरगोधा से करीब 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित है।
‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ कैसे काम करता है?
जनरल चौहान ने बताया कि ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ ऐसा हथियार होता है जो किसी इलाके में एक निश्चित समय सीमा या लगभग दो घंटे तक हवा में मंडराते रहते हैं और जब इन्हें कोई लक्ष्य नहीं मिलता तो ये नीचे गिरकर कहीं न कहीं टकरा जाते हैं। जनरल चौहान ने कहा कि ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ में से कोई एक किराना हिल्स की पहाड़ियों में से किसी एक पहाड़ी से टकरा गया होगा।
चौहान ने कहा कि लोगों के सवालों की यह भी एक वजह हो सकती है क्योंकि पाकिस्तानी मीडिया ने कुछ ऐसी तस्वीरें दिखाई थीं जिनमें किराना हिल्स की पहाड़ियों से धुआं निकलता दिख रहा था।
ट्रंप के मध्यस्थता वाले दावे पर क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे पर कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर यानी युद्धविराम के लिए मध्यस्थता की, चौहान ने कहा कि युद्धविराम का फैसला दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच हुआ था।
जनरल चौहान ने कहा, “मुझे इसमें किसी और की भूमिका नजर नहीं आती। यह जानकारी अमेरिकियों तक कैसे पहुंची कि उन्होंने हमारे ऐलान करने से पहले ही ट्वीट कर दिया? मुझे पूरा यकीन है कि यह जानकारी हमारी ओर से लीक नहीं हुई। मुझे लगता है कि यह दूसरी तरफ से लीक हुई है।”
पाकिस्तान की समझ काफी कमजोर
जनरल चौहान ने कहा कि समुद्री क्षेत्र में हालात को लेकर पाकिस्तान की समझ काफी कमजोर थी। उन्होंने कहा, “उनकी हर दिन की ब्रीफिंग में बताया जाता था कि अरब सागर में भारत का कैरियर बैटल ग्रुप कहां जा रहा है और जब मैंने वेस्टर्न नेवल कमांड से पता किया कि उन दिनों कैरियर बैटल ग्रुप कहां था तो वह उस जगह से लगभग 100 से 300 नॉटिकल मील दूर था।”
जनरल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान को भारत के कैरियर बैटल ग्रुप के बारे में गलत जानकारी मिल रही थी या उसकी जानकारी सटीक नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान जानकारी के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भर था। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के लंबी दूरी वाले समुद्री विमान उड़ान ही नहीं भर सके।
चीनी मूल के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहा था पाकिस्तान
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन और पाकिस्तान के बीच सैन्य तालमेल को लेकर भी जनरल चौहान ने अपनी बात कही। जनरल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के 70% या 80% प्लेटफॉर्म चीनी मूल के थे।
भारत के दूसरे सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा, “चाहे जमीन पर आधारित सिस्टम हों, हवाई प्लेटफॉर्म हों या नौसेना के प्लेटफॉर्म, हमारे पास भी विदेशी प्लेटफॉर्म का स्टॉक है और जब हमें ये प्लेटफॉर्म मिलते हैं, तो इनके रखरखाव और सर्विसिंग की जिम्मेदारी OEM (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर) की होती है। उनके प्रतिनिधि आम तौर पर उन देशों में मौजूद होते हैं जहां ये उपकरण तैनात किए जाते हैं, क्योंकि उन्हें ही इन्हें चालू हालत में रखना होता है।”
जनरल ने कहा कि चीनी OEM के लोग वहां मौजूद रहे होंगे और चीन ने भी माना है कि उनके लोग वहां थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने चीनी सैटेलाइट से मदद लेने की कोशिश की लेकिन वे टारगेट को नहीं भेद पाए।
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