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अपने पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को घूसकांड में क्लीनचिट देगी CBI, केस बंद करने की तैयारी

इस मामले के जांच अधिकारी एसपी सतीश डागर ने इस साल अगस्त में व्यक्तिगत कारणों से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की इच्छा जताई थी। डागर के आवेदन पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

सीबीआई के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना। (फाइल फोटो)

सीबीआई के पूर्व निदेशक राकेश अस्थाना को भ्रष्टाचार के सभी आरोपों से मुक्त किया जा सकता है। इंडियन एक्सप्रेस को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस मामले में सीबीआई के जांच अधिकारी ने अस्थाना को सभी आरोपों से दोषमुक्त करने संबंधी रिपोर्ट तैयार कर ली है।

इस रिपोर्ट को अब उच्च अधिकारियों को सौंपा जाएगा। मालूम हो कि केंद्रीय जांच एजेंसी के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा ने अस्थाना के खिलाफ एफआईआर में उनपर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए थे। इससे पहले इस मामले के जांच अधिकारी एसपी सतीश डागर ने इस साल अगस्त में व्यक्तिगत कारणों से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की इच्छा जताई थी। डागर के आवेदन पर अभी कोई नहीं निर्णय लिया गया है।

सूत्रों ने बताया कि डागर की रिपोर्ट की रिपोर्ट एजेंसी में अभी कानूनी राय के लिए लंबित पड़ी है। इसके बाद इसे निवर्तमान निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला को भेजा जाएगा। एक बार शुक्ला की तरफ से हरी झंडी मिलने के बाद सक्षम अदालत में अस्थाना को दोषमुक्त करने वाली चार्जशीट या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।

सूत्रों ने बताया कि इस मामले में अन्य प्रमुख आरोपी बिचौलिया मनोज प्रसाद और सोमेश प्रसाद के खिलाफ जांच जारी रहेगी। सूत्रों ने बताया कि एजेंसी इन पर लगे कथित उगाही के आरोपों की जांच करती रहेगी। एजेंसी ने बृहस्पतिवार को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले की जांच के लिए अतिरिक्त समय की मांग की।

इससे पहले 30 मई को दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई को चार महीने में अपनी जांच पूरी करने को कहा था। सीबीआई ने अपने आवेदन में कहा कि जांच में हुई प्रगति की रिपोर्ट को अदालत के ध्यानार्थ सीलबंद कवर में जमा किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार एजेंसी का दावा है कि विदेश में जांच से जुड़े कुछ मुद्दे अभी लंबित हैं। सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा ने 15 अक्टूबर 2018 को राकेश अस्थाना के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज कराई थी।

इसमें आरोप लगाया गया था कि एक मामले में मीट कारोबारी मोईन कुरैशी को 2.95 करोड़ रुपये अस्थाना को देने के लिए मजबूर किया गया था। यह रकम प्रसाद बंधुओं द्वारा दी जानी थी। इस मामले में संदिग्ध सतीश सना बाबू को सीबीआई ने गवाह बनाया था।

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