किसान आंदोलन को लेकर BJP नेता का कृषि मंत्री पर निशाना- सत्ता का अहंकार उनके सिर चढ़ गया है

पूर्व राज्यसभा सदस्य रहे रघुनंदन शर्मा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि नरेंद्र जी आपका इरादा किसानों की मदद करने का हो सकता है लेकिन यदि किसान स्वयं अपना भला नहीं चाहते तो ऐसी भलाई का क्या औचित्य है।

Author Edited By रुंजय कुमार भोपाल | Updated: February 6, 2021 10:50 PM
Farmer protest , farm laws, ministerकेंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर। (फोटो- एएनआई)

केन्द्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध प्रदर्शन को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक पुराने कार्यकर्ता रघुनंदन शर्मा ने केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर पर निशाना साधते हुए कहा है कि सत्ता का अहंकार उनके सर चढ़ गया है। मध्यप्रदेश से भाजपा के पूर्व राज्यसभा सदस्य रहे रघुनंदन शर्मा ने दो दिन पहले फेसबुक पर लिखे अपनी पोस्ट में कृषि मंत्री तोमर को सुझाव दिया कि उन्हें राष्ट्रवाद को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए।

पूर्व राज्यसभा सदस्य रहे रघुनंदन शर्मा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि नरेंद्र जी आपका इरादा किसानों की मदद करने का हो सकता है लेकिन यदि किसान स्वयं अपना भला नहीं चाहते तो ऐसी भलाई का क्या औचित्य है। उन्होंने आगे लिखा कि ‘प्रिय नरेंद्र जी’ आप भारत शासन में सहयोगी एवं सहभागी हैं। आज की राष्ट्रवादी सरकार बनने तक हज़ारों राष्ट्रवादियों ने अपने जीवन और यौवन को खपाया है। पिछ्ले 100 वर्षों से जवानियां अपने त्याग समर्पण और परिश्रम से मातृभूमि की सेवा तथा राष्ट्रहित सर्वोपरि की विचारधारा के विस्तार में लगी हुई हैं। आपको यह भ्रम हो गया है कि आज आपको जो सत्ता के अधिकार प्राप्त हैं वे आपके परिश्रम का फल है। सत्ता का मद जब चढ़ता है तो नदी, पहाड़ या वृक्ष की तरह दिखाई नहीं देता, वह अदृश्य होता है जैसा कि अभी आपके सिर पर चढ़ गया है।

आगे रघुनंदन शर्मा ने लिखा है कि आप प्राप्त दुर्लभ जनमत को क्यों खो रहे हो? कांग्रेस की सभी सड़ी गली नीतियाँ हम ही लागू करें, यह विचारधारा के हित में नहीं है। बूंद-बूंद से घड़ा खाली होता है, जनमत के साथ भी यही है। आपकी सोच कृषकों के हित की हो सकती है परंतु कोई स्वयं का भला नहीं होने देना चाहता तो बलात् भलाई का क्या औचित्य है। साथ ही उन्होंने लिखा कि आप राष्ट्रवाद को बलशाली बनाने में संवैधानिक शक्ति लगाओ, कहीं हमें बाद में पछताना ना पड़े। सोचता हूं विचारधारा के भविष्य को सुरक्षित रखने का संकेत समझ गए होंगे।

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