दिग्गज बीजेपी नेता सोलंकी बोले- पेगासस का सच सामने आना जरूरी

हरियाणा और त्रिपुरा के राज्यपाल रह चुके सोलंकी ने पीटीआई से कहा- लोकतंत्र आपसी विश्वास पर टिका है और दूसरा निजता की सुरक्षा होनी चाहिए।

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भारत के उपराष्ट्रपति से हाथ मिलाते हरियाणा के तत्कालीन गवर्नर कप्तान सिंह सोलंकी (फोटोः ट्विटर @VPSecretariat)

पूर्व राज्यपाल एवं वरिष्ठ भाजपा नेता कप्तान सिंह सोलंकी ने पेगासस जासूसी मामले में जांच का समर्थन करते हुए सोमवार को कहा कि संसद का गतिरोध दूर करने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष को आपसी बातचीत से कोई रास्ता निकालना चाहिए।

हरियाणा और त्रिपुरा के राज्यपाल रह चुके सोलंकी ने पीटीआई से कहा- लोकतंत्र आपसी विश्वास पर टिका है और दूसरा इसकी निजता की सुरक्षा होनी चाहिए। पेगासस का मुद्दा विदेशी एजेंसियों ने उठाया है। इसमें दोनों पक्षों के सांसदों, पत्रकारों सहित कई लोगों के नाम हैं। इससे एक प्रकार का अविश्वास पैदा हो गया है। इसमें सच क्या है, इसकी जांच होनी चाहिए। जिन दो एजेंसियों ने यह समाचार छापा है, उनसे इसका स्रोत पूछा जाना चाहिए, ताकि यदि कुछ है तो सामने आएगा और अगर वह झूठ है तो उसका पर्दाफाश होगा और फिर मामला खत्म हो जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि पेगासस मुद्दा अब उच्चतम न्यायालय में चला गया है, इसलिए इस मामले को अब शीर्ष अदालत के निर्णय पर छोड़ देना चाहिए, क्योंकि मामला अब अदालत में विचाराधीन है। संयुक्त संसदीय समिति से जांच पर सोलंकी ने कहा कि ये सत्ता पक्ष का विषय है कि वह इस पर क्या निर्णय लेता है क्योंकि इसकी जो बारीकियां हैं, सत्ता पक्ष ज्यादा जानता है।

उनका कहना था कि इस पर जो अविश्वास खड़ा हुआ है, इसे दूर करने के लिए सबको मिलकर कोई रास्ता निकालना चाहिए तथा परिणाम यह होना चाहिए कि संसद में विधेयक चर्चा व बहस से पारित हों। भाजपा में आने से पहले आरएसएस में लंबे समय तक काम कर चुके सोलंकी ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह आवश्यक है कि संसद को चलने दिया जाए।

सोलंकी ने कहा कि सदन के व्यवस्थित संचालन की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की है। दोनों को इस बात के लिए सहमत होना चाहिए कि विधेयक पास करने के लिए संसद में चर्चा होनी चाहिए। उन्हें इस मामले  पर बात करनी चाहिए। ताकि कोई रास्ता निकाला जा सके।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई विपक्षी सांसदों ने एक सप्ताह पहले पेगासस जासूसी मुद्दे पर संसद परिसर में केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था और उन्होंने उच्चतम न्यायालय की निगरानी में मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है।

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