पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम एम नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रहे विवाद के बीच उन्होंने खुद प्रतिक्रिया दी है। जनरल नरवणे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पेंगुइन इंडिया के आधिकारिक बयान का स्क्रीनशॉट साझा किया और लिखा, “यह किताब की मौजूदा स्थिति है।” इस पोस्ट के जरिए उन्होंने किताब को लेकर चल रही चर्चाओं पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

इससे पहले पेंगुइन इंडिया ने भी एक बयान जारी कर किताब के प्रकाशित होने के दावों का खंडन किया था। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कहा कि इस किताब के प्रकाशन का अधिकार केवल उनके पास है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि किताब अभी प्रकाशन प्रक्रिया में नहीं गई है और पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की ओर से इसकी कोई भी प्रति न प्रिंट में न डिजिटल या किसी अन्य रूप में जारी की गई है।

पेंगुइन पब्लिकेशन ने भी कानूनी कार्रवाई की दी चेतावनी

पेंगुइन पब्लिकेशन ने यह भी चेतावनी दी कि अगर किताब की कोई भी प्रति, पूरी या आंशिक रूप से, प्रिंट, पीडीएफ, डिजिटल या किसी अन्य फॉर्मेट में ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, तो यह कॉपीराइट का उल्लंघन है। ऐसे किसी भी अवैध और अनधिकृत प्रसार को तुरंत रोका जाना चाहिए और इसके खिलाफ सभी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए मेजर नरवणे की किताब “फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी” की कथित प्री-प्रिंट कॉपी के ऑनलाइन सर्कुलेशन की जानकारी पर केस दर्ज किया है। पुलिस ने बताया कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन न्यूज फोरम पर ऐसी पोस्ट और रिपोर्ट सामने आई थीं, जिनमें दावा किया गया था कि किताब की कॉपी इंटरनेट पर साझा की जा रही है, जबकि इसके प्रकाशन के लिए आवश्यक मंजूरी अभी नहीं मिली थी।

पुलिस ने मामले की जांच स्पेशल सेल को सौंपी

जांच में पुलिस को पता चला कि इसी नाम की एक टाइपसेट पीडीएफ कॉपी कुछ वेबसाइटों पर उपलब्ध थी, जिसे पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा तैयार बताया गया है। इसके अलावा कुछ ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म पर किताब का फाइनल कवर भी दिख रहा था, जिससे ऐसा प्रतीत होता था कि किताब बिक्री के लिए उपलब्ध है।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि मामले की जांच स्पेशल सेल को सौंप दी गई है। इस जांच का उद्देश्य पीडीएफ के स्रोत का पता लगाना, इसे अपलोड या सर्कुलेट करने की परिस्थितियों का पता लगाना और यह देखना है कि प्रकाशन, कॉपीराइट या आधिकारिक मंजूरी से जुड़े किसी कानून का उल्लंघन हुआ या नहीं।

यह भी पढ़ें: Exclusive: चार साल में 35 किताबों को मंजूरी, सिर्फ जनरल नरवणे का मामला सरकार के पास लंबित