2024 में अविभाजित तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे की बातचीत पटरी से उतारने के लिए अधीर रंजन चौधरी को जिम्मेदार ठहराया था। दोनों दलों के बीच तल्खी की बड़ी वजह ममता बनर्जी पर अधीर रंजन चौधरी के लगातार तीखे हमले थे।
दो साल से ज्यादा समय बाद और तृणमूल कांग्रेस के तीन हिस्सों में बंट जाने के बाद अब इस नेता ने पुरानी कड़वाहट भुलाने का फैसला किया है।
अधीर रंजन चौधरी ने गुरुवार को कहा, “पुरानी बातें भूल जाइए।” उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को न सिर्फ कांग्रेस में शामिल होने का न्योता दिया, बल्कि उन्हें बंगाल कांग्रेस की कमान संभालने का भी प्रस्ताव दिया।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “मैं ममता बनर्जी को सलाह देता हूं… और अपने हाईकमान से भी पूछता हूं… ममता बनर्जी कांग्रेस में क्यों शामिल नहीं हो जातीं? वह अपनी पार्टी के बचे हुए सभी सांसदों और विधायकों के साथ कांग्रेस में क्यों नहीं शामिल हो जातीं?”
कांग्रेस नेता का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब बगावत के कारण ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के बचे हुए हिस्से के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।
मई में बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद 60 सांसदों के एक समूह ने पार्टी से अलग होकर खुद को असली तृणमूल कांग्रेस घोषित कर दिया। तृणमूल के नेता इस झटके से उबर भी नहीं पाए थे कि 20 से ज्यादा सांसदों ने एक अलग गुट बना लिया। इस गुट ने एक कम चर्चित राजनीतिक संगठन के साथ विलय कर लिया और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन दे दिया।
चौधरी ने कहा कि चूंकि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की ही एक शाखा है, इसलिए उन्हें पार्टी में लौटने में कोई “समस्या” नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर वह कांग्रेस की ही उपज हैं, तो उनके कांग्रेस में शामिल होने में कोई समस्या नहीं है।” हालांकि, उन्होंने एक शर्त भी रखी।
अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “क्या आप जानते हैं कि ममता बनर्जी का बोझ क्या है? उस बोझ को हटाकर ममता बनर्जी को सीधे कांग्रेस पार्टी में शामिल हो जाना चाहिए।” माना जा रहा है कि उनका इशारा ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी की ओर था।ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत करने वाले कई नेताओं ने टीएमसी में हुए तीन धड़ों के बंटवारे के लिए उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया था।
ममता बनर्जी ने 1970 के दशक में कांग्रेस नेता के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। 1998 में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) बनाई। 2011 में उनकी पार्टी ने पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे के 34 साल लंबे शासन को खत्म कर दिया था।
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा ममता बनर्जी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ आज की बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों का इतिहास देखें तो 2001, 2009, 2010, 2009 के लोकसभा चुनाव और 2011 में कांग्रेस ने ममता बनर्जी का समर्थन किया था।
उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि कांग्रेस लगातार ममता बनर्जी की मदद करती रही है। चौधरी के मुताबिक कि आज भी जिन्हें लगता है कि ममता बनर्जी मुश्किल में हैं, वे सबसे पहले किसके पास जाते हैं? सोनिया गांधी के पास।
चौधरी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कभी ममता बनर्जी का विरोध नहीं किया, बल्कि ममता बनर्जी ने हमारा विरोध किया। चौधरी ने कहा कि बंगाल में हम कांग्रेस के अंदर आपके साथ काम करेंगे। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले ममता बनर्जी के गुट ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया था।
हालांकि, ममता बनर्जी के साथ अब भी खड़े टीएमसी सांसद सौगत राय ने कहा कि अगर ऐसा कोई प्रस्ताव पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से आधिकारिक तौर पर आता है, तभी उस पर विचार किया जाएगा।
सौगत राय ने कहा कि उन्होंने (अधीर रंजन चौधरी) जो महसूस किया, वह कहा है। हमें इस पर कुछ नहीं कहना है। टीएमसी अब एक अलग पार्टी है। अगर कांग्रेस आधिकारिक प्रस्ताव लेकर आती है तो पार्टी में इस पर चर्चा होगी। टीएमसी अभी भी INDIA गठबंधन का हिस्सा है।
वहीं, भाजपा ने कहा कि ममता बनर्जी द्वारा बनाई गई TMC का अब कोई उद्देश्य नहीं रह गया है। बीजेपी के पश्चिम बंगाल प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा कि टीएमसी का गठन कांग्रेस से अलग होकर CPI(M) से लड़ने के लिए हुआ था और इसी मुद्दे पर वह सत्ता में आई थी। अब टीएमसी खुद सत्ता से बाहर है, इसलिए उसके पास कोई दूसरा उद्देश्य नहीं बचा है।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सेंट्रल दिल्ली में अपने भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के घर के लॉन में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने वाली थीं तो पड़ोस से आ रही लॉन मोवर की आवाज ने उनकी आवाज को दबा दिया। पढ़ें पूरी खबर।
