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एनजीटी ने उत्तराखंड, हिमाचल सरकार को दिया नोटिस, आग से नैनीताल में दो और की मौत

इस साल अब तक वनाग्नि में 3739 हेक्टेअर जंगल जल कर खाक हो चुके हैं जबकि नैनीताल जिले में दो और लोगों की मृत्यु हो गयी

Author नई दिल्ली/ देहरादून | May 5, 2016 12:59 AM
उत्तराखंड के कोटद्वार में लगी आग। (पीटीआई फोटो)

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के जंगलों में लगी आग के मुद्दे पर बुधवार (4 मई) को पर्यावरण व वन मंत्रालय और दोनों राज्यों की सरकारों से जवाब मांगा। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाले पीठ ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी नोटिस जारी किया और इसे मामले में 10 मई तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा जो सुनवाई की अगली तारीख है। इस बीच उत्तराखंड में ज्यादातर स्थानों पर बीती रात भर हुई हल्की से मध्यम बारिश से पूरे राज्य में जंगलों में लगी आग को बुझाने के लिए चलाए जा रहे अभियान में बहुत मदद मिली जबकि नैनीताल जिले में दो और लोगों की मृत्यु होने से पिछले काफी समय से जंगलों में लगी आग से होने वाली मौतों की संख्या सात हो गई है।

एनजीटी ने मंगलवार (3 मई) को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा था कि वह इस बात को लेकर स्तब्ध है कि हर कोई इस मुद्दे को बहुत हल्के में ले रहा है। बुधवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बड़े हिस्से में लगी भीषण आग जम्मू-कश्मीर तक पहुंच गई है। अधिवक्ता ने कहा, जंगल में लगी यह आग एक सालाना घटना है। लेकिन कोई भी कुछ नहीं कर रहा। यह पर्यावरण के लिए आपदा है। वन क्षेत्र गंभीर खतरे में हैं और अधिकारी कुछ नहीं कर रहे हैं। यह गंभीर लापरवाही है। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक गंभीर पर्यावरण मुद्दा है क्योंकि ऐसी आग प्रदूषण पैदा करती हैं और ग्लेशियर को भी प्रभावित करती है।

मंत्रालय और राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील से पीठ ने पूछा, आपने क्या कार्रवाई की है? इन आग के बारे में आपको समय रहते सूचना दी गई। आपने क्या कदम उठाया? आज, आग भीषण है। यह जरूर ही कहीं से शुरू हुई होगी। ऐसी आग के बारे में अलर्ट पर क्या किया जा रहा? इस पर वकीलों ने कहा, ‘हम सभी ब्योरा लेकर आएंगे।’ पीठ ने मंत्रालय और दोनों राज्य सरकारों से इस सिलसिले में उठाए गए कदमों से अवगत कराने और ऐसी घटनाआें को रोकने के लिए एहतियाती उपायों के बारे में भी जानकारी देने को कहा। केंद्र ने दावा किया है कि राज्य में स्थिति नियंत्रण में है। आग के चलते उत्तराखंड में 3,000 हेक्टेयर वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। उधर उत्तराखंड में ज्यादातर स्थानों पर मंगलवार रात भर हुई हल्की से मध्यम बारिश से पूरे राज्य में जंगलों में लगी आग को बुझाने के लिए चलाए जा रहे अभियान में बहुत मदद मिली जबकि नैनीताल जिले में दो और लोगों की मृत्यु होने से पिछले काफी समय से जंगलों में लगी आग से होने वाली मौतों की संख्या सात हो गई।

राज्य के मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने देहरादून में संवाददाताओं को बताया कि मंगलवार (3 मई) से कई जगहों पर हुई वर्षा से वनाग्नि को काबू करने में काफी मदद मिली और इस समय स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। सिंह ने बताया कि आज कई स्थानों से आग लगने की 90 ताजा घटनाएं सामने आई, जिनमें से 76 पर तुरंत काबू पा लिया गया। उन्होंने कहा कि हालांकि 14 अन्य स्थानों पर आग पर नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं और उस पर भी जल्दी ही काबू पा लिया जाएगा। मुख्य सचिव ने बताया कि आज आग बुझाने के लिए वायुसेना के एम आई-17 हैलीकाप्टर का प्रयोग नहीं किया गया।

इस साल अब तक वनाग्नि में 3739 हेक्टेअर जंगल जल कर खाक हो चुके हैं जबकि नैनीताल जिले में दो और लोगों की मृत्यु हो गयी जिससे 15 अप्रैल से घोषित किए गए फायर सीजन के दौरान मरने वालों की संख्या सात पहुंच गई। मुख्य सचिव ने कहा कि फिलहाल राज्य का मुख्य ध्यान वनाग्नि पर पूर्ण नियंत्रण पाने पर है और उसके बाद वन्यजीवों को हुए नुकसान का आकलन कर उसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। नौ मई से शुरू हो रही चारधाम यात्रा के रूटों को पूरी तरह सुरक्षित बताते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि श्रद्घालु यहां बेफिक्र होकर आएं और वनाग्नि का कोई बुरा प्रभाव चारधाम यात्रा की तैयारियों पर नहीं पड़ा है।

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