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3 साल में पहली बार पीएम मोदी ने बुलाई नेशनल गंगा काउंसिल की बैठक, पर नहीं पहुंचे नीतीश कुमार, ममता बनर्जी भी गायब

3 साल में पहली बार बुलाई गई इस बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर उत्तराखंडके सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी मौजूद हैं। इस बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्य मंत्री ममता बनर्जी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार नहीं पहुंचे हैं।

Author नई दिल्ली | Updated: December 14, 2019 1:02 PM
पीएम मोदी ने तीन साल बाद नेशनल गंगा काउंसिल की बैठक नीतीश कुमार और ममता बनर्जी नहीं पहुंचे।

गंगा सफाई के लिए बनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली ‘राष्ट्रीय गंगा परिषद’ (नेशनल गंगा काउंसिल या एनजीसी) की पहली बैठक कानपुर के चंद्रशेखर आजाद यूनिवर्सिटी में हो रही है। 3 साल में पहली बार बुलाई गई इस बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर उत्तराखंडके सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी मौजूद हैं। इस बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्य मंत्री ममता बनर्जी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार नहीं पहुंचे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी कानपुर में ‘नमामि गंगे’ परियोजना के तहत गंगा नदी को अविरल और निर्मल करने के प्रयासों की समीक्षा करेंगे। परिषद की पहली बैठक में मोदी कानपुर शहर में ”नमामी गंगे” की परियोजनाओं की स्थिति और नदी में गिर रहे नालों का जायजा लेंगे। प्रधानमंत्री चकेरी हवाईअड्डे पर उतरने के बाद हेलीकॉप्टर से चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय पहुंचे। इसके बाद उन्होंने नमामि गंगे अभियान के तहत लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

गंगा परिषद की बैठक के बाद प्रधानमंत्री गंगा बैराज स्थित अटल घाट जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के मद्देनजर वहां कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। कड़े सुरक्षा इंतजामों के चलते सीएसएयू और गंगा बैराज के आसपास के अतिथिगृहों में एक दिन के लिए सभी समारोह स्थगित कर दिए गए हैं। यातायात प्रतिबंधों के चलते इन इलाकों के कई स्कूलों में छुट्टी का भी ऐलान किया गया है।

बता दें राष्ट्रीय गंगा परिषद का गठन तीन साल पहले अक्टूबर 2016 में पीएम मोदी की अध्यक्षता में किया गया था। इसका उद्देश्य गंगा नदी का संरक्षण, सुरक्षा और प्रबंधन करना है। गंगा नदी से जुड़ी परियोजनाएं मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तराखंड से संबंधित हैं। भारत सरकार ने गंगा नदी के संरक्षण के लिए मई 2015 में नमामी गंगे कार्यक्रम को मंज़ूरी दी थी। इसके तहत गंगा नदी की सफाई के लिए दिशानिर्देश बनाए गए थे। जैसे- नगरों से निकलने वाले सीवेज का ट्रीटमेंट, औद्योगिक प्रदूषण का उपचार, नदी के सतह की सफाई, ग्रामीण स्वच्छता, रिवरफ्रंट विकास, घाटों और श्मशान घाट का निर्माण, पेड़ लगाना और जैव विविधता संरक्षण इत्यादि शामिल हैं।

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