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Conflict of interest विवाद में यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत: संसदीय समिति प्रमुख रहते कंपनी को फीस लेकर सेवाएं देंगे बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री

जयंत ने B4U Network के सीईओ इशान सक्सेना को लिखे पत्र में कहा है कि वह कंपनी के लिए सही टर्म पर वित्तीय सहायता जुटाने में भी मददगार हो सकते हैं।

jayant sinhaभाजपा सांसद जयंत सिन्हा (फोटो सोर्सःएजेंसी)

पूर्व केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा Conflict of interest विवाद में फंसते दिख रहे हैं। मोटी फीस की एवज में एक एंटरटेनमेंट कंपनी को अपनी सेवाएं दे सकते हैं। इसके लिए उन्होंने B4U Network के सीईओ इशान सक्सेना को उन्होंने एक पत्र भी लिखा है। यह 12 फरवरी को लिखा गया था। इसके मुताबिक सिन्हा ने सकसेना की कंपनी टाइगर मीडिया के लिए अपनी सेवा देने की बात कही है। उन्होंने सक्सेना से कहा है कि वह कंपनी के लिए सही टर्म पर वित्तीय सहायता जुटाने में भी मददगार हो सकते हैं। सिन्हा ने 1 मार्च से अपनी सेवा देने की पेशकश कंपनी को की है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, सिन्हा ने 12 फरवरी को एनआरआई इन्वेस्टर अरमिंदर सिंह से मुलाकात के बाद सक्सेना को यह पत्र लिखा था। उनका कहना है कि टाइगर मीडिया को वैश्विक स्तर पर चैंपियन बनाने के लिए काम करेंगे। इसके लिए वह पर्याप्त समय देने के लिए तैयार हैं। पत्र के मुताबिक सिन्हा ने कहा है कि वह अमुक रकम पर सेवाएं दे सकते हैं। इसका बिल वह हर माह के आखिर में कंपनी को भेज देंगे।

गौरतलब है कि मौजूदा समय में जयंत सिन्हा वित्त से जुड़ी संसदीय समिति के प्रमुख हैं। इससे पहले वह बतौर नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री, वित्त राज्य मंत्री काम कर चुके हैं। उनके पिता यशवंत सिन्हा, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार (1998-2002) में वित्त मंत्री थे। तब जयंत ने बंधक ब्याज कर कटौती और आईटी रिटर्न भरने के लिए सरल फॉर्म और कर अनुपालन में सुधार करने जैसी कई नई पहलों पर नीतिगत जानकारी प्रदान की।

सिन्हा ने मैकिंसे एंड कंपनी के साथ 12 साल काम किया है। उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल, एमएस से डिस्टींगशन के साथ एमबीए किया है। पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय से ऊर्जा प्रबंधन और नीति में, और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली से डिस्टींगशन के साथ प्रौद्योगिकी स्नातक की डिग्री हासिल की है। उन्हें अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम, वाशिंगटन डीसी के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया गया था। फिलहाल वह भाजपा के सांसद हैं।

एक सवाल के जवाब पर सिन्हा ने कहा कि मैनेजमेंट कंसलटेंट के तौर पर वह अक्सर अपनी सेवा देते रहे हैं। अभी वह सांसद हैं, इसलिए किसी विवाद से बचने के लिए वह भारत के बाहर के मामलों में केवल सलाहकार के तौर पर काम करते हैं। वित्तीय फर्म और लेनदेन के मामलों में वह हाथ नहीं डालते। हालांकि B4U मीडिया को लिखे पत्र में वह सही टर्म पर वित्तीय सहायता जुटाने का भरोसा भी दिला रहे हैं। उनका कहना है कि अरमिंदर सिंह को वह बीते 25 साल से जानते हैं। उनके साथ B4U मीडिया को लेकर कुछ बात हुई थी।

उधर, टाइगर मीडिया के प्रवक्ता ने बताया कि अरमिंदर सिंह से उनके ग्रुप का कोई वास्ता नहीं है। भारत या भारत से बाहर उनका ग्रुप कभी भी किसी राजनीतिक व्यक्ति के साथ मिलकर काम नहीं करता है। गौरतलब है कि अरमिंदर सिंह दिल्ली, बैंकाक और लंदन में रहता है। 2015 में स्विस बैंक में पैसा जमा कराने वालों की लिस्ट में वह 31 वें नंबर पर था। उसने तकरीबन सौ भारतीय लोगों रके 39.7 करोड़ डॉलर स्विस बैंक में जमा कराए थे।

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