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लिक्विडिटी बढ़ाने को निर्मला सीतारमण ने बैंकों को दिया ‘शामियाना मंत्र’, अगले 10 दिनों तक 200 जिलों में नए कर्ज देने की सलाह, NPA में भी दी छूट

बकौल सीतारमण, "अगले 200 जिलों में कुछ ऐसी ही सभाएं 10 से 15 अक्टूबर के बीच होंगी। बाजार में लिक्विडिटी को लेकर हमने समीक्षा भी की है। यह कहते हुए खुशी भी है कि बैंक कम से कम आगे बढ़ रहे हैं।"

Author नई दिल्ली | Updated: September 19, 2019 9:23 PM
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।

देश की पस्त अर्थव्यवस्था और Economic Slowdown के माहौल के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बाजार में कैश की दिक्कत से निपटने के लिए बैंकों को शामियाना मंत्र दिया है। उन्होंने कहा है कि कर्ज देने के लिए नॉन बैंकिंग फाइनैंशियल कंपनियों के साथ देश भर के कुल 400 जिलों में बैंक खुली बैठकें/सभाएं करें।

गुरुवार (19 सितंबर, 2019) शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा- बैंक एनबीएफसी और खुदरा कर्ज लेने वालों के साथ 400 जिलों में बैठकें करेंगे। ये बैठकें अगले सप्ताह से शुरू होंगी। इसका मकसद मकान खरीदारों और किसानों समेत कर्ज चाहने वालों को ऋण सुलभ कराना है।

वित्त मंत्री के मुताबिक, “खुले रूप से ये बैठकें दो चरणों में होगी। पहली बैठक मंगलवार 24 सितंबर से 29 सितंबर को 200 जिलों में होगी। उसके बाद 10 अक्टूबर से 15 अक्टूबर के बीच 200 अन्य जिलों में इसी प्रकार की बैठकें होंगी। इसके पीछे सोच यह है कि त्योहारों के दौरान ज्यादा-से-ज्यादा कर्ज देना सुनिश्चित किया जा सके। दिवाली अक्टूबर में है और इसे देश में खरीदारी का सबसे अच्छा समय माना जाता है।”

इन खुली बैठकों में खुदरा, कृषि और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों) और आवास एवं अन्य क्षेत्रों के लिए कर्ज उपलब्ध कराए जाएंगे। मंत्री ने बताया कि बैंकों से दबाव वाले किसी भी एमएसएमई कर्ज को 31 मार्च 2020 तक फंसा कर्ज (एनपीए) घोषित नहीं करने को कहा गया है।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संवाददाता सम्मेलन मे कहा कि रिजर्व बैंक की ओर से पहले ही परिपत्र जारी किया जा चुका है, जिसमें कहा गया है कि एमएसएमई के दबाव वाले कर्ज को एनपीए घोषित नहीं किया जाए। बैंकों को इस परिपत्र का अनुपालन करने को कहा गया है। बैंकों से कहा गया है कि वे एमएसएमई के दबाव वाले कर्ज को मार्च, 2020 तक एनपीए घोषित नहीं करें और उनके कर्ज के पुनर्गठन के लिए काम करें।

उन्होंने कहा कि इससे एमएसएमई क्षेत्र की मदद हो सकेगी। बैंकों ने कुछ ऐसी एनबीएफसी की पहचान की हैं, जिन्हें कर्ज उपलब्ध कराया जा सकता है। ऐसे में कर्ज लेने के इच्छुक लोगों को नकदी और ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा। (पीटीआई-भाषा इनपुट्स के साथ)

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