जब हरेश वी. मच्छार खिड़की से बाहर जमा मीडिया, शुभचिंतकों और राहगीरों को देखते हैं, तो वे थोड़े परेशान और सतर्क लगते हैं। बुधवार को फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट में कॉकपिट के अंदर हुए हमले को नाकाम करते हुए घायल हुए उनके भतीजे पायलट स्मित मच्छार की बहादुरी के बाद से ही घाटकोपर में उनके घर और चेंबूर में उनके भतीजे के घर के बाहर लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही है।
और हालांकि उन्हें स्मित पर गर्व है, लेकिन परिवार अब आगंतुकों की अंतहीन भीड़ से थक चुका है। हरेश कहते हैं, “बुधवार शाम से ही टीवी मीडिया हमें परेशान कर रहा है।” उन्होंने कहा, “वे बड़ी संख्या में माइक और कैमरे लेकर जमा हो गए, हमसे बिना पूछे कि क्या हम बात करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने हमारी शूटिंग शुरू कर दी, हमारी तस्वीरें खींचीं और हमें लाइव स्ट्रीम किया और पूरी रात वहीं रहे। यह बहुत परेशानी का सबब बन गया है। हां, हमें उस पर गर्व है, लेकिन हम उसकी रिकवरी को लेकर ज्यादा चिंतित हैं।”
फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 के कैप्टन थे स्मित
स्मित दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 के कैप्टन थे। इसमें 174 यात्री और क्रू मेंबर्स के सदस्य सवार थे। वह उस समय घायल हो गए जब उनके सह-पायलट ने कथित तौर पर उन पर हमला किया और उड़ान के दौरान कॉकपिट के अंदर उन पर बार-बार चाकू से वार किया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, स्मित ने तुरंत प्रतिक्रिया करते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इससे यात्रियों को को-पायलट को काबू करने और विमान को सुरक्षित रूप से उतारने में मदद मिली।
स्मित का फिलहाल दुबई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। उनके कामों की विश्व के नेताओं ने तारीफ की। पीएम नरेंद्र मोदी ने उनके साहस और त्वरित सोच की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने ‘हमें एक और 9/11 जैसी घटना से बचाया’, वहीं इजरायल के बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें सच्चा नायक कहा।
शुभचिंतकों का लगा तांता
घटना के बाद से शुभचिंतकों का तांता लगा हुआ है। चाहे वह स्मित के चेंबूर स्थित स्वास्तिक हाइट्स सीएचएस आवास पर हो या उनके चाचा हरीश के घाटकोपर के अरविंद स्थित प्रभाता सीएचएस आवास पर। लेकिन मीडिया की चकाचौंध और शोरगुल से परे कुछ और भी बड़ा है। लोग स्मित के स्वास्थ्य को लेकर चिंता और उनके जल्दी स्वस्थ होने की प्रार्थनाएं कर रहे हैं।
गुरुवार की सुबह जब उनके घर के बाहर भीड़ जमा हो गई, तब भी स्मित के माता-पिता, उपेंद्र और गीता मच्छार, अपने बेटे के साथ रहने के लिए दुबई रवाना हो गए। उसकी चाची ने कहा, “हम उनके संपर्क में हैं। स्मित की हालत अब स्थिर है। वह बचपन से ही बहुत प्यारा, बहादुर और साहसी लड़का रहा है। वह हमेशा अपने आसपास के लोगों की मदद करता था। जब वह मुश्किल से 10 साल का था, तब भी वह बुजुर्गों को सड़क पार कराने में मदद करता था।”
एक रिटायर्ड गुजराती व्यापारी और एक गृहिणी के बेटे स्मित ने घाटकोपर में कई साल बिताए। अब वे अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ दुबई में रहते हैं, जबकि उनके माता-पिता अब चेंबूर में रहते हैं। स्मित के माता-पिता के पड़ोसी अशोक मकवाना का कहना है कि स्मित का चचेरा भाई भी पायलट है।
उन्होंने कहा, “परिवार को कल रात विमानन कंपनी से फोन आया था और पूरे समाज को टेलीविजन समाचारों के माध्यम से इस घटना के बारे में पता चला। वह जब भी संभव होता है अपने माता-पिता से मिलने जाता है और त्योहारों के दौरान घर आना सुनिश्चित करता है।”
जो लोग उन्हें अच्छी तरह जानते हैं, उनके लिए उनके ये काम कोई आश्चर्य की बात नहीं हैं। उनके दोस्त और पड़ोसी अक्षय दोषी कहते हैं, “स्मित हमेशा से ऐसे ही थे, निडर और मिलनसार। वो दिल के बहुत खुले थे।” माटुंगा स्थित वेलिंगकर संस्थान में, उनके शिक्षक उन्हें मेहनती छात्र बताते हैं। संस्थान के निदेशक पंकज नाटू कहते हैं, “पढ़ाई में भी वे बहुत अच्छे थे। उन्हें ‘ए’ ग्रेड मिलता था और वे सभी क्लास में उपस्थित रहते थे।” वहीं, उन्हें मार्केटिंग मैनेजमेंट पढ़ाने वाले शैलेश काले कहते हैं, “हम संस्थान में उन्हें सम्मानित करने की संभावना पर विचार कर रहे हैं। इससे छात्रों को बहुत सकारात्मक संदेश मिलेगा।”
चेम्बूर में पायलट के घर के बाहर, लोगों का प्यार उमड़ रहा है। चेम्बूर के पार्षद सुशम सावंत ने बच्चों सहित 100 लोगों को इकट्ठा करने में कामयाबी हासिल की है। वह मच्छार की तस्वीर और साहस, दूरदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा शब्दों वाले पोस्टर पकड़े हुए हैं।
स्मित को उनके कामों के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए
सावंत का कहना है कि स्मित को उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए। वे वीर पायलट के भव्य स्वागत की योजना बना रहे हैं। वे कहते हैं, “हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें उनकी बहादुरी के लिए देश के सर्वोच्च सम्मानों में से एक से सम्मानित करें। उन्हें यह सम्मान मिलने से और भी बच्चे और युवा बहादुर बनने और हमेशा लोगों की मदद करने के लिए प्रेरित होंगे।” वे आगे कहते हैं, “यह दिवाली चेंबूर और घाटकोपर के लिए और भी भव्य होने वाली है।”
भीड़ में कक्षा 9 का एक छात्र भी है। वह कहता है, “मैं बड़ा होकर स्मित की तरह बनना चाहता हूं और लोगों की जान बचाना चाहता हूं।” जैसे ही यह खबर फैली, प्रभाता सीएचएस में दोस्त और पड़ोसी परिवार को मीडिया की चकाचौंध से बचाने और कुछ निजता प्रदान करने के लिए एकजुट हो गए। उनमें स्मित के दोस्त अक्षय दोषी भी शामिल थे।
दोशी ने कहा, “विमानन हमेशा से स्मित का जुनून रहा है। चेंबूर में उनका एक छोटा सा संस्थान भी है जहां वे युवाओं को प्रशिक्षण देते हैं और उन्हें विमानन क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।” उन्होंने कहा, “हम उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं।”
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विपरीत परिस्थितियों में अगर विवेक का साथ बना रहे, तो यह किसी त्रासद नतीजों के रुख को भी मोड़ देने में सक्षम साबित हो सकता है। बुधवार को दुबई से इजराइल की राजधानी तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में अगर उसके पायलट कैप्टन स्मित मछार ने हिम्मत के साथ अपने ऊपर हुए हमले का सामना नहीं किया होता, तो विमान में मौजूद एक सौ चौहत्तर यात्रियों के साथ क्या होता, कहा नहीं जा सकता। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
