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शिक्षा मंत्रालय के परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में पंजाब, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह सहित पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिला A++ ग्रेड, बिहार और मेघालय फिसड्डी

शिक्षा मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी प्रदर्शन श्रेणीकरण सूचकांक पंजाब सहित पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उच्चतम ए++ श्रेणी मिली है। जबकि बिहार और मेघालय का प्रदर्शन सबसे कमतर रहा।

रविवार को जारी शिक्षा मंत्रालय के परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में पंजाब, चंडीगढ़ सहित पांच राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अव्वल रहे तो वहीं बिहार का प्रदर्शन सबसे कमतर रहा। (एक्सप्रेस फोटो: अभिनव साहा)

शिक्षा मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी प्रदर्शन श्रेणीकरण सूचकांक (पीजीआई) में 2019-20 में स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब, चंडीगढ़, तमिलनाडु, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह तथा केरल को उच्चतम ए++ श्रेणी मिली है। जबकि आधारभूत ढांचे और सुविधाओं के लिहाज से बिहार और मेघालय का प्रदर्शन सबसे कमतर रहा।

रविवार को जारी रिपोर्ट में श्रेणीकरण सूचकांक 70 मानकों पर राज्यों के प्रदर्शन का विश्लेषण करता है और इसमें दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान, पुडुचेरी, दादरा और नागर हवेली को ए+ श्रेणी प्राप्त हुई है। अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह और ओडिशा ने आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में 2019-20 और 2018-19 में उल्लेखनीय सुधार दिखाया है। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने आधारभूत ढांचों और सुविधाओं में सुधार की दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी है, अलबत्ता ये कहीं कम तो कहीं ज्यादा है।

रिपोर्ट में कहा गया कि पीजीआई के अवसंरचना व सुविधाओं के कार्यक्षेत्र में 13 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने 10 प्रतिशत का सुधार दिखाया है, जबकि शासन प्रक्रिया के पीजीआई के कार्यक्षेत्र में 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने 10 प्रतिशत या उससे ज्यादा का सुधार दिखाया है। इसमें कहा गया कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, पंजाब, राजस्थान तथा पश्चिम बंगाल ने कम से कम 20 प्रतिशत का सुधार दिखाया है। 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया, “हालांकि, यह सामान्य जानकारी है कि शिक्षकों, प्राचार्यों और प्रशासनिक कर्मियों की कमी, नियमित पर्यवेक्षण और निरीक्षण की कमी, शिक्षकों का अपर्याप्त प्रशिक्षण, समय पर धन की उपलब्धता (यह सभी शासन और प्रबंधन के कार्यक्षेत्र के दायरे में आते हैं) कुछ कारक हैं, जिनसे देश में शिक्षा व्यवस्था चरमरा रही है, यह पहली बार है कि कोई ऐसा माध्यम है जो इनकी पुष्टि करता है।” इसमें कहा गया, “पीजीआई के जरिये कमियों को निष्पक्ष और नियमित रूप से आंका जा सकता है। यह खामियों को दूर करने के लिये आवश्यक कदम उठाने के लिहाज से अहम है।”

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