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इस बार सामान्य से 5 प्रतिशत कम बारिश की आशंका, सितंबर के बाद भी जारी रहेगा मानसून

भारत के लिए इस बार मानसून अच्छा नहीं रहा। इस बार के सीजन में नॉर्मल से भी 5 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं अब मानसून के कुल 10 ही दिन बचे हैं।

जल्द ही मानसून उत्तर भारत में पहुंच जाएगा।

भारत के लिए इस बार मानसून अच्छा नहीं रहा। इस बार के सीजन में नॉर्मल से भी 5 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं अब मानसून के कुल 10 ही दिन बचे हैं। यह बात इसलिए हैरान करने वाली है क्योंकि भारतीय मौसम विभाग ने पहले भविष्यवाणी की थी कि इस बार नॉर्मल बारिश से ज्यादा बारिश होगी। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, भारतीय मौसम विभाग के डीएस पाई ने इस बारे में जानकारी दी। डीएस पाई ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होगी। खासकर दक्षिणी प्रायद्वीप पर। लेकिन यह भी है कि उस बारिश से भी हम 5 प्रतिशत की कमी को मुश्किल ही पूरा कर पाएंगे। इस सीजन के अंत तक 2-4 प्रतिशत की कमी रह ही जाएगी। हालांकि, फिर भी इस मानसून को ‘नॉर्मल’ की कैटगरी में रखा जा सकता है।’ हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मानसून सितंबर के बाद भी जारी रह सकता है।

मानसून कमजोर क्यों रहा इसपर बात करते हुए एक्सपर्ट ने ला नीना का नाम लिया। उन्होंने बताया कि प्रशांत महासागर पर ला नीना का उतना असर नहीं रहा जितना कि होना चाहिए था। ला नीना ऐसी प्रक्रिया है जिसमें प्रशांत महासागर का जल सामान्य से कहीं अधिक गर्म हो जाता है। इसकी वजह से दक्षिणी अमेरिका से दक्षिणी-पूर्व और दक्षिणी एशिया की ओर बहने वाली हवाओं की गति धीमी पड़ जाती है। जब प्रशांत महासागर का पानी गर्म होता है, तब उसके ऊपर के वातावरण में शुष्कता बढ़ती है। इसका असर मानसून पर पड़ता है। हालांकि प्रतिवर्ष अल-नीनो मानसून के लिए बुरा नहीं होता। अल-नीनो के कारण दुनिया में बाढ़, सूखा जैसे अनेक मौसमी परिवर्तन आते हैं। यह पृथ्वी की जलवायु प्रक्रिया का प्राकृतिक अंग है। ला नीना अल नीनो का उल्टा है। यह भारतीय मानसून के लिए इस्तेमाल होता है।

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