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पूर्व सैनिकों के हेल्थ स्कीम में फर्जीवाड़ा, एक साल में 500 करोड़ रुपये के फर्जी बिल लगाए गए: रिपोर्ट

करप्शन के 61 पर्सेंट केस दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ से हैं। ईसीएचएस स्कीम 52 लाख लाभार्थी हैं।

एक साल में ही 500 करोड़ रुपये के फर्जी बिल लगाए गए। फोटो: इंडियन एक्सप्रेस

एक्स सर्विसमैन कॉन्ट्रिब्यूट्री हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) में फर्जीवाड़े की खबर है। इस स्कीम के तहत पूर्व सैनिकों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाती है। अलग-अलग अस्पतालों से जो बिल ईसीएचएस के पास पहुंच रहे हैं या तो फर्जी हैं या फिर बिल में उन चीजों को भी शामिल किया गया है जिनका उपयोग हुआ ही नहीं। ऐसे बिल 16 से 20 प्रतिशत हैं। इन बिल में ऐसे ट्रीटमेंट को
भी जोड़ दिया गया है जिनका ट्रीटमेंट हुआ हीं नहीं। पिछले एक साल में ही 500 करोड़ रुपये के फर्जी बिल लगाए गए हैं।

यही नहीं बिल को बढ़ा चढ़ाकर पेश करने के लिए ऐसे मरीज के इलाज के खर्च को भी शामिल किया गया है जो कभी अस्पताल में भर्ती ही नहीं हुआ। एनबीटी में छपी खबर के मुताबिक, पैनल में शामिल निजी अस्पतालों को ईसीएचएस से बाहर करने की बात कही गई थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इस स्कीम में चल रही इस धांधली के बारे में रक्षा मंत्रालय भी अवगत है।

रक्षा मंत्रालय के अधीन डिपार्टमेंट ऑफ एक्स सर्विसमैन वेलफेयर के कुछ अधिकारियों और कुछ राजनीतिक हस्तक्षेप की वजह से जानकारियां होने के बावजूद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। हालांकि कुछ अस्पतालों को पैनल से बाहर करने की कोशिश की गई लेकिन बाद में कार्रवाई को रोक दिया गया। मेरठ, नोएडा और पानीपत के कुछ निजी अस्पतालों के खिलाफ यह कदम उठाए गए थे।

मेरठ में एक केस पर कार्रवाई काफी हद तक आगे भी बढ़ी लेकिन यह बेनतीजा निकली। इस केस में एक आर्मी के मेजर जनरल स्तर के अधिकारी ने जांच की और रक्षा मंत्रालय के समक्ष संबंधित अस्पताल को पैनल से बाहर करने की सिफारिश की।

ऐसी ही एक शिकायत मेरठ के एक और अस्पताल के खिलाफ थी जिसकी जांच मेरठ हेडक्वॉर्टर द्वारा की गई और पिछले साल 8 अगस्त को रक्षा मंत्रालय की तरफ से अस्तपताल का निरीक्षण किया गया। जिसके बाद 29 अगस्त को डॉक्टरों की एक टीम ने अस्पताल का दौरा किया। जिसके बाद डॉक्टरों की टीम ने अपनी जांच में पाया कि अस्पताल को पैनल से बाहर किया जाना चाहिए। इसकी सिफारिश रक्षा मंत्रालय को कर दी गई लेकिन इसपर भी कोई एक्शन नहीं लिया गया।

वहीं नोएडा के एक अस्पातल में चल रही अनियमितताओं को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री मंत्रालय के समक्ष गए तो और अस्पताल को पैनल से बाहर करने के लिए कहा था। पूर्व सीएम की इस सिफारिश पर जांच की गई तो पता चला कि अस्पताल द्वारा बिल को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जा रहा है। ऐसा ही हाल गुड़गांव और दिल्ली के एक जाने-माने अस्पताल का ही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मामलों की जांच करने वाले अधिकारियों को किसी न किसी तरह से प्रभावित किया जा रहा है। करप्शन के 61 पर्सेंट केस दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ से हैं। ईसीएचएस स्कीम 52 लाख लाभार्थी हैं। इस स्कीम में देशभर से 2000 अस्पतालों को पैनल में शामिल किया गया है।

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