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बंगाल, उत्तराखंड समेत पांच राज्यों के हाई कोर्ट को मिले नए मुख्य न्यायाधीश

देश के नए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने देशभर में लंबित मामलों को खत्म करने की प्रक्रिया की ओर कदम बढ़ाया था। उन्होंने देशभर की अदालतों में जजों की खाली पड़ी सीटों को लेकर स्वत: संज्ञान लिया था। जस्टिस गोगोई ने सभी राज्यों और उच्च न्यायालयों से निचली अदालतों में खाली पड़े पदों और उन रिक्तियों को भरने की चल रही प्रकिया का पूरा ब्योरा मांगा था।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

देश के पांच उच्च न्यायालयों में बुधवार को नये मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए। यह जानकारी कानून मंत्रालय की अधिसूचना में दी गई है। उत्तराखंड, सिक्किम, कलकत्ता, गौहाटी और बंबई उच्च न्यायालयों में नियुक्तियां की गई हैं। आंध्रप्रदेश और तेलंगाना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रमेश रंगनाथ को उत्तराखंड उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। नैनीताल में स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के एम जोसफ को अगस्त में उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विजय कुमार बिष्ट को सिक्किम उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश देबाशीष कार गुप्ता को पदोन्नत कर वहीं पर मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। कर्नाटक उच्च न्यायालय में न्यायाधीश अज्जीकुट्टीरा सोमैया बोपन्ना को गौहाटी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। न्यायमूर्ति नरेश हरिश्चंद्र पाटिल को बंबई उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। इन नयी नियुक्तियों के साथ ही देश के सभी 24 उच्च न्यायालयों के पास पूर्णकालिक मुख्य न्यायाधीश हो गए हैं।

बता दें कि देश के नए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने देशभर में लंबित मामलों को खत्म करने की प्रक्रिया की ओर कदम बढ़ाया था। उन्होंने देशभर की अदालतों में जजों की खाली पड़ी सीटों को लेकर स्वत: संज्ञान लिया था। जस्टिस गोगोई ने सभी राज्यों और उच्च न्यायालयों से निचली अदालतों में खाली पड़े पदों और उन रिक्तियों को भरने की चल रही प्रकिया का पूरा ब्योरा मांगा था। इसके लिए उन्होंने 31 अक्तूबर तक का समय दिया था। इस मामले की अगली सुनवाई 1 नवंबर को होनी है।

वैसे बता दें कि पूरे देश की निचली अदालतों में उच्च न्यायिक सेवा के कुल 22,033 पद स्वीकृत हैं, जिसमें अभी भी 5,133 पद खाली हैं। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने इन खाली पड़े पदों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में रिक्तियां बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं।

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 4 जनवरी, 2007 के अपने उस आदेश को भी राज्यों और उच्च न्यायालयों को याद दिलाया, जिसमें राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा उच्च और निम्न न्यायिक सेवा अधिकारियों की भर्ती की प्रक्रिया के प्रत्येक चरण के लिए एक समय सीमा निर्धारित की गई थी। इस समयसीमा के अनुसार, प्रत्येक राज्य में दो से तीन उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की एक समिति यह सुनिश्चित करेगी कि सभी मौजूदा और भविष्य की रिक्तियों को 31 मार्च तक अधिसूचित किया जाएगा और उसी साल 31 अक्टूबर तक भर दिया जाएगा।

सीजेआई रंजन गोगोई ने पूछा कि क्या इस समयसीमा का पालन किया गया था और अगर नहीं किया गया तो बताएं कि खाली पड़े पदों को भरने के लिए बाहरी समय सीमा क्या है? कोर्ट ने कहा है कि 1 नवंबर को मामले की सुनवाई से पहले राज्यों को न्यायिक बुनियादी सुविधाओं और श्रमशक्ति (मैनपावर) की पर्याप्तता की भी जानकारी देनी होगी। पीठ ने राज्यों और उच्च न्यायालयों से यह सुझाव देने के लिए भी कहा कि रिक्त पदों को भरने के बाद उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं और श्रमशक्ति (मैनपावर) पर्याप्त होगी या नहीं?

(एजेंसी इनपुट के साथ।)

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