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जामिया यूनिवर्सिटी गेट के बाहर दो संदिग्धों ने की फायरिंग, स्कूटी पर सवार होकर आए थे आरोपी

एक बयान में कहा गया है कि हमलावर एक लाल रंग की स्कूटी पर आए थे। हमले में कोई हताहत नहीं हुआ।

Author नई दिल्ली | Published on: February 3, 2020 7:44 AM
jamiaपुलिस ने कहा कि वह जामिया समन्वय समिति (जेसीसी) के दावों की जांच कर रही है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर के गेट संख्या पांच पर रविवार (2 फरवरी, 2020) रात दो अज्ञात व्यक्तियों ने गोली चलाई। जामिया समन्वय समिति (जेसीसी) ने यह जानकारी दी। समिति द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि हमलावर एक लाल रंग की स्कूटी पर आए थे। हमले में कोई हताहत नहीं हुआ। बयान में कहा गया है कि एक बदमाश ने लाल रंग की जैकेट पहन रखी थी। पुलिस ने कहा कि वह समिति के दावों की जांच कर रही है। बता दें कि दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शन स्थल के पास एक व्यक्ति द्वारा हवा में दो गोलियां चलाने के एक दिन बाद वहां सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। यह स्थान संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शन का केंद्र बन गया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि दो स्तर पर बैरिकेड लगाए गए हैं जिनके बीच की दूरी 100 मीटर है। इन्हें प्रदर्शन स्थल की ओर जाती हुई सड़क के दोनों तरफ लगाया गया है।

पुलिस ने कहा कि लोग अंदर की गलियों से भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचते हैं। अधिकारी ने कहा कि जब भी पुलिस कोई अपील या घोषणा करती है तो उसे जनता से तीखी प्रतिक्रिया मिलती है। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा जगह को खाली कराए जाने की गलत सूचना भी सोशल मीडिया के जरिये फैलाई जा रही है। अधिकारी ने कहा कि कोई अप्रिय घटना न हो इसलिए हमने बैरिकेड के दो स्तर लगाए हैं और प्रदर्शन स्थल पर आने जाने वालों की सख्त जांच की जा रही है। गौरतलब है कि शनिवार को भी एक व्यक्ति ने शाहीन बाग में हवा में दो गोलियां चलाई थी। हालांकि बाद में उसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।

इस बीच, चुनाव आयोग ने दक्षिणपूर्व दिल्ली के डीसीपी चिन्मय बिस्वाल को रविवार को तत्काल प्रभाव से हटा दिया। आयोग ने इलाके की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए यह कदम उठाया। उल्लेखनीय है कि इलाके के शाहीन बाग और जामिया नगर में इस हफ्ते गोलीबारी की घटनाएं हुई थी। आयोग ने अतिरिक्त डीसीपी (दक्षिणपूर्व) कुमार ज्ञानेश को इलाके का प्रभार संभालने का निर्देश दिया है।

वहीं जामिया मिल्लिया इस्लामिया के बाहर सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी में घायल हुए विश्वविद्यालय के छात्र ने इस घटना को ‘अतिराष्ट्रवाद का परिणाम’ करार दिया है। शदाब फारूक ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि बृहस्पतिवार को जो कुछ हुआ उसे ‘अतिराष्ट्रवाद का नतीजा’ कहा जा सकता है। उसने लिखा, ‘‘यदि आप इसे एक प्रदर्शन बनाना चाहते हैं तो आप बनाइए। काला झंडा उठाइए, लाल झंडा उठाइए।’’ उसने कहा कि इस घटना के लिए अकेले दिल्ली पुलिस को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उसने कहा कि जामिया प्रशासन और कुलपति को भी जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

जनसंचार पाठ्यक्रम के छात्र ने इस घटना का ब्योरा दिया और कहा कि जामिया समन्वय समिति ने 30 जनवरी को विश्वविद्यालय से राजघाट तक गांधी मार्च का आह्वान किया था। उसने लिखा, ‘‘मैं उसमें शामिल होने वाला था और मार्च के आगे बढ़ने के लिए भीड़ का इंतजार कर रहा था, तभी मैंने देखा कि अचानक एक व्यक्ति हाथ में पिस्तौल लिये होली फैमिली (अस्पताल) की ओर बढ़ रहा है। मैंने देखा वहां मेरे कुछ दोस्त खड़े थे। मैं उसे शांत करने के लिए तत्काल उसकी ओर दौड़ा।’’

उसने लिखा, ‘‘लोग पुलिस से उसे रोकने के लिए कह रहे थे। वे लगातार चिल्ला रहे थे कि उसके पास पिस्तौल है लेकिन पुलिस ने नहीं सुनी। बजाय वह वीडियो बनाती रही। मैं कहता रहा कि बंदूक रख दो। मैंने दो बार कहा। जब मैंने तीसरी बार ऐसा कहा तो उसने मेरे बाये बांह पर गोली चला दी।’’ फारूक ने कहा कि उसने जो कुछ किया, वह कोई नायक का काम नहीं था बल्कि उसे जो सही लगा, उसने किया।

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