तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम ने शुक्रवार को कोलकाता नगर निगम के महापौर पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि वह अब इस जिम्मेदारी को पहले की तरह समुचित ढंग से निभा नहीं पा रहे हैं, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीतिक हलचल के बीच यह घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व मंत्री और पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक फिरहाद हकीम ने अपना इस्तीफा संबंधित अधिकारियों को सौंप दिया है।
विधायक हकीम नवंबर 2018 से केएमसी के महापौर के रूप में काम कर रहे थे और स्वतंत्रता के बाद से शहर के पहले मुस्लिम महापौर थे।
अपने बयान में उन्होंने कहा, ”मैं अपनी नेता ममता बनर्जी का आभार व्यक्त करता हूं। दिसंबर 2018 में सोवन चटर्जी के अचानक इस्तीफे के बाद मुझे कोलकाता नगर निगम के पार्षदों द्वारा महापौर चुना गया था। मैंने पूरी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। लेकिन अब मैं इस जिम्मेदारी को निभाने में सक्षम नहीं महसूस कर रहा हूं क्योंकि महापौर का पद केवल एक कुर्सी नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है।”
कोलकाता के महापौर के रूप में हकीम का उत्तराधिकारी कौन होगा, इसकी कोई जानकारी सामने नहीं आयी है। फिरहाद हकीम ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार में कई विभाग भी संभाले हैं। कोलकाता नगर निगम 2010 से तृणमूल के नियंत्रण में है।
बुधवार को फिरहाद हकीम के इस्तीफे की खबर पर तृणमूल कांग्रेस के सीनियर नेता कुणाल घोष ने बताया था कि फिरहाद कोलकाता मेयर पद से सम्मानजनक विदाई चाहते थे क्योंकि राज्य सरकार नगर निगम को निष्क्रिय कर रही थी। इस्तीफे को लेकर उन्होंने ममता बनर्जी से अनुमति मांगी थी और उन्होंने इस्तीफे की इजाजत दे दी।
कमर में रस्सी बांधकर घुमाने पर हाईकोर्ट सख्त
पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस की सख्त कार्रवाई को लेकर पूरे राज्य में चर्चा रही है। हालांकि, पुलिस की इस कथित ‘अतिसक्रियता’ या ‘सड़क पर न्याय’ (स्ट्रीट जस्टिस) की प्रवृत्ति अब एक बड़े कानूनी और संवैधानिक सवाल के घेरे में आ गई है। अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पुलिस अधिकारी शुभेंदु सरकार को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आरोप हो सकते हैं। लेकिन कानून के तहत उसके साथ गरिमा और सम्मान का व्यवहार किया जाना चाहिए।
