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हादसा या हरकत? आंदोलन स्थल पर 4 ढांचों में आग, टिकैत बोले- पहले से आशंका थी

बृहस्पतिवार को दिल्ली हरियाणा सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए बने तीन से चार अस्थायी ढांचे आग लगने की वजह से क्षतिग्रस्त हो गए।

rakesh-tikait, farmer protest, singhu borderकिसान नेता नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सिंघु बॉर्डर पर लगे आग की आशंका पहले ही व्यक्त की गयी थी। (फोटोः ट्विटर@rakeshtikaitbku)

दिल्ली की सीमाओं पर केंद्र सरकार के द्वारा पारित किए गए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन पिछले चार महीने से भी अधिक समय से चल रहा है। पिछले साल नवंबर में शुरू हुआ आंदोलन अप्रैल की भीषण गर्मी में भी जारी है। इसी बीच दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर किसानों के लिए बने अस्थाई ढांचे में आग लग गई। सिंघु बॉर्डर पर टेंट में लगी आग पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि इसकी आशंका पहले से ही थी।

 दरअसल बृहस्पतिवार को दिल्ली हरियाणा सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए बने तीन से चार अस्थायी ढांचे आग लगने की वजह से क्षतिग्रस्त हो गए। अचानक लगी आग को देखकर किसानों में अफरा-तफरी मच गई और वहां मौजूद किसानों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। आग की लपेटें फैलती देखकर आसपास खड़ी ट्राली को वहां से दूर किया गया। इस दौरान किसानों ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों ने जानबूझ कर किसानों के टेंट में आग लगाई है ताकि प्रदर्शन कर रहे किसानों का मनोबल तोड़ा जा सके। हालांकि बाद में दमकल विभाग ने जैसे तैसे कोशिश कर आग को बुझाया।

किसान नेता नेता राकेश टिकैत ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज सिंघु बॉर्डर पर 4 टेंट आग लगने से जलकर राख हो गए। एक बड़ा हादसा टल गया। इसकी आशंका पहले ही व्यक्त की गयी थी। साथ ही राकेश टिकैत ने कहा कि हरियाणा सरकार व केंद्र सरकार किसानों की सुरक्षा हेतु अग्निशमन के आवश्यक इंतजाम करे। हालांकि किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा ने आरोप लगाया कि यह साजिश है और किसी ने जानबूझकर आग लगाई। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कुछ किसानों ने एक व्यक्ति को भागते हुए देखा। पुलिस अधिकारी ने कहा कि किसानों के दावों की जांच की जा रही है।

बता दें कि कोरोना के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखकर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किसानों को अपना आंदोलन वापस लेने को कहा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि मानवता के नाते किसान अपना आंदोलन वापस लें।

साथ ही उन्होंने कहा कि किसान अपना धरना हालात ठीक होने पर भी कर सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने प्रदर्शन वाले जिलों के उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे आंदोलनरत किसानों से संपर्क कर उन्हें मनाने की कोशिश करें।

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