प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बेंगलुरु में एक अमेरिका से संचालित ईसाई मिशनरी संगठन और सात लोगों के खिलाफ़ पुलिस केस दर्ज करवाया है। संगठन पर आरोप है कि इसने 92.55 करोड़ रुपये से ज़्यादा का गैर-कानूनी विदेशी फंड भारत में भेजा है। कहा जा रहा है कि इसका एक हिस्सा छत्तीसगढ़ और असम के माओवाद प्रभावित इलाकों में भी पहुंचा है।
ED की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज
गुरुवार को कोथनूर पुलिस स्टेशन में ED की शिकायत के आधार पर दर्ज FIR के मुताबिक नॉर्थ कैरोलिना के रैले में हेडक्वार्टर वाली टिमोथी इनिशिएटिव (TTI) ने अमेरिकी बैंक के डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करके भारत में विदेशी फंड भेजा। वहीं फंड को कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और असम में ATM से कैश निकाला गया। यह फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) और फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) का उल्लंघन है। नवंबर 2025 और अप्रैल 2026 के बीच कथित तौर पर कानूनों का उल्लंघन करते हुए 92.55 करोड़ रुपये ($9.9 मिलियन) का ट्रांज़ैक्शन किया गया।
बांटे गए 1,000 से ज़्यादा विदेशी डेबिट कार्ड
पिछले कुछ सालों में पूरे भारत में 1,000 से ज़्यादा ऐसे विदेशी डेबिट कार्ड बांटे जाने का आरोप है। असिस्टेंट डायरेक्टर सुनील कुमार सिंहमार की फाइल की गई ED शिकायत में बेंगलुरु में TTI के इंडिया ऑपरेशंस हेड जोनाथन एस राजन, बेंगलुरु के मीका मार्क, कोथनूर के अजीत वर्गीस मथाई, धमतरी छत्तीसगढ़ के वर्गीस चाको; असम के बबलू कुर्मी और मैसूर के सुप्रीम जॉय का भी नाम है।
ED ने कहा कि फंड बिना वैलिड FCRA रजिस्ट्रेशन या सरकारी परमिशन के लिए लिए गए और इस्तेमाल किए गए। कार्ड कथित तौर पर संतोष कुमार नाम के एक फर्जी नाम से जारी किए गए थे। इसके अलावा ED की रेड के बाद TTI का ग्लोबल पोर्टल भारतीय यूज़र्स के लिए पहुंच से बाहर हो गया और मार्क के कहने पर डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड कथित तौर पर डिलीट कर दिए गए।
ED ने कहा कि उसकी जांच से पता चला है कि माओवाद प्रभावित इलाके धमतरी में एक कोऑपरेटिव बैंक की विजया पलेजा ब्रांच के ATM में विदेशी डेबिट कार्ड का इस्तेमाल किया गया था, और वर्गीस चाको कथित तौर पर पैसे निकालने की देखरेख कर रहा था। इसने दावा किया कि माओवादी यूनिट्स और कैडर से जुड़े कैश-बेस्ड नेटवर्क को बनाए रखने के लिए इन इलाकों में 6.34 करोड़ रुपये भेजे जाने के सबूत मिले हैं।
गैर-कानूनी गतिविधियों का समर्थन करना था मकसद
FIR में कहा गया है कि विदेशी फंड का मकसद माओवादी-प्रभावित इलाकों में गैर-कानूनी गतिविधियों का समर्थन करना था। जोनाथन राजन पर आरोप है कि उसने TTI के पूरे भारत के फाइनेंशियल ऑपरेशन्स की देखरेख की और लेयर LLC और कार्क्सेस LLC जैसी फ्रंट यूनिट्स के ज़रिए फंड भेजने के लिए अजीत वर्गीस मथाई के साथ समन्वय किया।
अजीत मथाई के ऑफिस की तलाशी ली गई और 37 लाख रुपये कैश ज़ब्त किया गया। FIR में कहा गया है कि भारत में TTI का कुल खर्च 95 करोड़ रुपये से ज़्यादा होने का अनुमान है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (4), 335(a)(2), 336(3), 238, 61(2), और 190 के साथ-साथ गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) एक्ट की धारा 13, 17, और 18 के तहत आरोप लगाए गए हैं।
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