महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे के लिए चुनौतियां एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। शिवसेना (यूबीटी) इस समय अपने ही सांसदों के बागी तेवरों की वजह से मझधार में फंसी हुई है। पार्टी के 9 में से 6 सांसद पाला बदलने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। चर्चा है कि ये सभी सांसद अलग गुट बनाकर बाद में एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय कर सकते हैं।
ऐसे में यह जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर वे पांच कारण क्या हैं, जिनकी वजह से ये सांसद उद्धव ठाकरे से दूर होते चले गए।
कारण नंबर 1: विधानसभा चुनाव में हार के बाद बढ़ी बेचैनी
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति को प्रचंड जनादेश मिला था, जबकि उद्धव ठाकरे को बड़ा सियासी झटका लगा। चुनावी नतीजों के बाद कई सांसदों को लगने लगा कि उद्धव ठाकरे ने समय रहते सही राजनीतिक गठबंधन नहीं किया। उनकी तरफ से हार के बाद भी आत्ममंथन नहीं हुआ। लंबे समय से विपक्ष की भूमिका में रहने की वजह से उनकी राजनीतिक ताकत भी कमजोर पड़ती दिखाई दी। यही वजह है कि कई सांसदों में असंतोष बढ़ने लगा।
कारण नंबर 2: विकास कार्यों के लिए नहीं मिल रहा था पर्याप्त फंड
जो सांसद इस समय उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने की तैयारी में बताए जा रहे हैं, उनमें कई ऐसे हैं जो अपने निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मिलने से नाराज हैं। उनका आरोप है कि उन्हें अपने क्षेत्र के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिल पा रहा था, जबकि महायुति सरकार की ओर से विकास योजनाओं के लिए धन जारी किया जा रहा था। माना जा रहा है कि इसी वजह से कई सांसदों ने अपनी राजनीतिक राह बदलने का मन बनाया।
कारण नंबर 3: मुंबई में हार बनी टर्निंग प्वाइंट
मुंबई हमेशा से शिवसेना का पारंपरिक गढ़ रही है। लेकिन मुंबई में राजनीतिक पकड़ कमजोर पड़ना उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें वह सफलता नहीं मिली, जिसकी उम्मीद की जा रही थी। मुंबई का हाथ से निकलना सिर्फ राजनीतिक हार नहीं था, बल्कि सांसदों के लिए भी एक बड़ा संदेश था कि पार्टी का जनाधार कमजोर हो रहा है।
कारण नंबर 4: एकनाथ शिंदे का बढ़ता प्रभाव
बागी सांसदों को लगता है कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे आज भी उनके संपर्क में रहते हैं और जरूरत पड़ने पर व्यक्तिगत स्तर पर मदद भी करते हैं। यही वजह है कि इन सांसदों के बीच शिंदे को लेकर एक सकारात्मक सोच और सहानुभूति मौजूद है। माना जा रहा है कि शिंदे की यही सक्रियता उन्हें अपनी ओर खींचने में मदद कर रही है।
कारण नंबर 5: मातोश्री की बैठक और उद्धव ठाकरे का सख्त रुख
14 जून को मातोश्री में हुई बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने कथित तौर पर नाराज सांसदों को साफ संदेश दिया था कि जिसे पार्टी छोड़कर जाना है, वह जा सकता है। उद्धव ठाकरे का यह सख्त रुख कई नाराज सांसदों को और ज्यादा अखर गया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इसी के बाद कुछ सांसदों ने पार्टी से दूरी बनाने का मन और मजबूत कर लिया।
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