रेलवे के कायाकल्प का जिम्मा उठाने को तैयार विश्व बैंक, रेल मंत्री समेत शीर्ष अफसरों को दिखाया अपना रोडमैप

भारत अगले 30 वर्षों में अपनी उस महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय रेल योजना को फ़ंड करना चाहता है। जिसके तहत लगभग 8,000 किलोमीटर हाई-स्पीड कॉरिडोर और 8,000 किलोमीटर का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) तैयार किया जाएगा। इसमें 40 लाख करोड़ रुपये का खर्च आयेगा।

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रेल एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव। (express file)

विश्व बैंक भारतीय रेलवे के कायाकल्प का जिम्मा उठाने को तैयार है। भारत अगले 30 वर्षों में अपनी उस महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय रेल योजना को फ़ंड करना चाहता है। जिसके तहत लगभग 8,000 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड कॉरिडोर और 8,000 किलोमीटर का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) तैयार किया जाएगा। इसमें 40 लाख करोड़ रुपये का खर्च आयेगा।

विश्व बैंक के शीर्ष अधिकारियों ने पिछले सप्ताह रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और अन्य शीर्ष अधिकारियों के सामने एक प्रेजेंटेशन में रेलवे के लिए अपने दृष्टिकोण और इसके प्रस्तावों को साझा किया। राष्ट्रीय रेल योजना और नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन ने निर्माणाधीन मुंबई-अहमदाबाद सहित पूरे भारत में कुल 13 बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनाने की सिफारिश की है।

वे मुंबई-नागपुर, हैदराबाद-बेंगलुरु, वाराणसी-पटना, पटना-कोलकाता, दिल्ली-उदयपुर, दिल्ली-चंडीगढ़-अमृतसर, नागपुर-वाराणसी, अमृतसर-पठानकोट-जम्मू, चेन्नई-मैसूर वाया बेंगलुरु, मुंबई-हैदराबाद और अयोध्या होते हुए वाराणसी-दिल्ली जैसे मार्गों पर बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनाना चाहते हैं। हालांकि,उन्हें इस पर कोई स्पष्टता नहीं है कि इसे और नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर  को कैसे फंड किया जाये। 

बैंक ने निजी कंपनियों के साथ साझेदारी से लेकर इंटरमॉडल स्टेशनों के विकास और मौजूदा लाइनों के उन्नयन के लिए अपनी विशेषज्ञता की पेशकश की है। 30 वर्षों में 8000 किमी डीएफसी और 8,000 किमी हाई स्पीड रेलवे कॉरिडोर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसका भुगतान कैसे होगा? प्रेजेंटेशन में कहा गया है कि इसका जिम्मा विश्व बैंक उठाएगा।

वर्तमान में, मुंबई से अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर की हाई-स्पीड रेलवे लाइन जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) से लोन लेकर बनाई जा रही है। जबकि पूर्वी भाग में विश्व बैंक की सहायता से लगभग 3,000 किमी दो डीएफसी का निर्माण किया जा रहा है। वहीं वेस्टर्न कॉरिडोर का काम जेआईसीए संभाल रही है।

क्या है डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर –
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का मतलब ऐसी रेल लाइन से है, जिसका इस्तेमाल सिर्फ मालगाड़ियों के आवागमन के लिए किया जाएगा। देश में ईस्टर्न और वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर बनाया जा रहा है। इनका इस्तेमाल सिर्फ मालगाड़ियों के लिए होगा। वेस्टर्न कॉरिडोर के न्‍यू रेवाड़ी-न्‍यू मदार सेक्‍शन का हिस्‍सा हरियाणा और राजस्‍थान में आता है. इस मार्ग पर न्‍यू रेवाड़ी, न्‍यू अटेली और न्‍यू फूलेरा जैसे तीन जंक्‍शन सहित नौ स्‍टेशन बनाए गए हैं। स्टेशनों में न्यू डाबला, न्यू भगेगा, न्यू श्री माधोपुर, न्यू पछार मालिकपुर, न्यू सकूल और न्यू किशनगढ़ शामिल हैं।

ईस्‍टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का ‘न्यू खुर्जा-न्‍यू भाऊपुर’ सेक्शन उत्‍तर प्रदेश में स्थित है। इसकी लंबाई 351 किलोमीटर है। इस खंड के बन जाने से कानपुर-दिल्‍ली मुख्‍य लाइन पर भीड़ कम होगी। इससे मालगाड़ियों की रफ्तार भी बढ़ेगी। अभी यात्री ट्रेन और मालगाड़ियां दोनों एक ही पटरी पर चलती हैं। इससे उनकी रफ्तार कम हो जाती है।

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