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बजट एस्टिमेट का 20% से कम खर्च करें विभाग, कोरोना काल में नकदी संकट पर वित्त मंत्रालय की दूसरे मंत्रालयों को सलाह

'सी' कैटगरी में 52 मंत्रालयों की अनुदान मांगें सूचीबद्ध हैं। इनमें कोयला, केमिकल एंड पेट्रोकेमिकल्स, टूरिज्म, स्टील, महिला एवं बाल विकास, युवा एवं खेल, शिपिंग, खनन, उच्च शिक्षा जैसे विभाग व मंत्रालय शामिल हैं।

Author Edited By प्रमोद प्रवीण नई दिल्ली | Updated: April 9, 2020 8:13 AM
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण. साथ में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर। (PTI फोटो)

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने कोरोना के संकट और लॉकडाउन को देखते हुए सभी मंत्रालयों को नए वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कम खर्च करने का सुझाव दिया है। बुधवार को वित्त मंत्रालय के बजट डिवीजन ने इस बावत एक ऑफिस मेमोरेंडम जारी किया है। इस मेमोरेंडम में मंत्रालयों को A,B और C कैटगरी में बांटकर उनके अनुदान या सरल शब्दों में कहें तो बजट एस्टिमेट के मुकाबले उनके व्यय अनुमानों (एक्सपेंडिचर एस्टिमेट) को कम रखने का सुझाव दिया गया है।

उदाहरण के लिए, श्रेणी बी के तहत, अनुदान की 31 मांगें सूचीबद्ध हैं, जिनमें फर्टिलाइजर, डाक-तार, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय जैसे मंत्रालय शामिल हैं। इन मंत्रालयों को वित्त मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि इन अनुदानों के लिए अप्रैल में बजट एक्सपेंडिटर का मात्र आठ फीसदी ही खर्च करे। इनके अलावा अगले दो महीने मई और जून में उस खर्च को छह फीसदी तक रखने का सुझाव दिया गया है। दूसरे शब्दों में कहें तो इन मंत्रालयों को साफ तौर पर कहा गया है कि साल भर के बजट अनुमानों का 20 फीसदी से ज्यादा रकम खर्च न करें।

इसी तरह ‘सी’ कैटगरी में 52 मंत्रालयों की अनुदान मांगें सूचीबद्ध हैं। इनमें कोयला, केमिकल एंड पेट्रोकेमिकल्स, टूरिज्म, स्टील, महिला एवं बाल विकास, युवा एवं खेल, शिपिंग, खनन, उच्च शिक्षा जैसे विभाग व मंत्रालय शामिल हैं। वित्त मंत्रालय ने इन मिनिस्ट्रीज के सालभर के खर्च अनुमानों का मात्र पांच फीसदी ही मौजूदा तिमाही के लिए मासिक खर्च निर्धारित किया है। इनके अलावा A कैटगरी में आने वाले मंत्रालयों के अनुदानों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वह पहले की तरह ही जारी रहेंगे।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा संकट को देखते हुए  सरकारी खर्च को कंट्रोल करना आवश्यक है। साथ ही उसका कड़ाई से पालन हो, यह भी अहम है। ज्ञापन में कहा गया है कि बड़े खर्चे पहले की तरह ही रेग्यूलेट होते रहेंगे। मौजूदा गाइडलाइंस में किसी तरह का बदलाव करने से पहले उसकी मंजूरी वित्त मंत्रालय से लेनी होगी। मंत्रालय का यह कदम कोरोना संकट की वजह से आई आर्थिक अनिश्चितता की पृष्ठभूमि में उठाया गया है।
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