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आज रात राज्यों को मिलेंगे जीएसटी के 20 हजार करोड़, काउंसिल की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की घोषणा

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हम राज्‍यों को मुआवजे की राशि से इनकार नहीं कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि कोरोना संकट की वजह से ऐसी स्थिति पैदा हुई है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। (फोटो-एएनआई)

जीएसटी के बकाये का इंतजार कर रहे राज्यों के लिए सोमवार को राहत की खबर आई। जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि राज्यों को आज रात (सोमवार)  जीएसटी का 20 हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे। ये राशि केंद्र को क्षतिपूर्ति सेस के जरिये प्राप्त हुई है, ऐसे में इसका वितरण राज्यों के बीच किया जाएगा।

इससे पहले जीएसटी को लेकर राज्य लगातार केंद्र सरकार पर दबाव बना रहे थे। वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हम राज्‍यों को मुआवजे की राशि से इनकार नहीं कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि कोरोना संकट की वजह से ऐसी स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि किसी ने भी ऐसी स्थिति की पहले  कल्पना नहीं की थी। केंद्रीय मंत्री ने साफ कहा कि मौजूदा स्थिति ऐसी नहीं है जिसमें ये कहें कि केंद्र सरकार फंड पर कब्‍जा करके बैठी है और देने से इनकार कर रही है।

बैठक में राज्यों को क्षतिपूर्ति दिये जाने के मामले में कोई आम सहमति नहीं बन पायी। परिषद क्षतिपूर्ति के लिये कर्ज लेने के उपाय पर राजनीतिक विचारों के आधार पर बटी दिखी। समिति की काफी देर तक चली बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 21 राज्यों ने केंद्र के सुझाये दो विकल्पों में से एक का चयन किया है।

उन्होंने कहा कि लेकिन कुछ राज्यों ने दोनों विकल्पों में से किसी का भी चयन नहीं किया। इसको देखते हुए परिषद की इस बारे में आगे और विचार-विमर्श को लेकर 12 अक्टूबर को फिर बैठक होगी। उल्लेखनीय है कि केंद्र ने राज्यों को जीएसटी संग्रह में कमी की भरपाई के लिए बाजार से या फिर रिजर्व बैंक से कर्ज लेने का विकल्प दिया है।

जीएसटी मीटिंग में यह तय किया गया कि लग्जरी और कई अन्य तरह की वस्तुओं पर लगने वाले क्षतिपूर्ति सेस को 2022 से भी आगे बढ़ाया जाएगा। इस तरह कार, सिगरेट जैसे प्रोडक्ट पर कम्पनसेशन सेस आगे भी लगता रहेगा। काउंसिल की तरफ से यह निर्णय राज्यों को नुकसान से बचाने के लिए लिया गया है। नियम के मुताबिक यह जीएसटी लागू होने के बाद सिर्फ पांच साल तक जारी रहना था।

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