ताज़ा खबर
 

CJI के खिलाफ महाभियोग: अरुण जेटली ने फेसबुक पर बताया, क्‍यों फेल हो गया विपक्ष का प्‍लान

कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उप राष्ट्रपति को इस मामले में सही सलाह नहीं दी गई थी। इसी कारण उन्होंने से प्रस्ताव को निरस्त किया है। सिब्बल ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली। (PTI File Photo)

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ लाए गए विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव को उप राष्ट्रपति वैंकैया नायडू ने ठुकरा दिया है। ये महाभियोग प्रस्ताव राज्यसभा के 64 सांसदों के हस्ताक्षर से लाया गया था। इस मामले पर विपक्ष की तरफ से हमले की अगुआई कर रहे कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उप राष्ट्रपति को इस मामले में सही सलाह नहीं दी गई थी। इसी कारण से उन्होंने से प्रस्ताव को निरस्त किया है। सिब्बल ने उप राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही है। वहीं, अब इस पूरे मामले पर फेसबुक पर पोस्ट लिखकर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपनी बात रखी है। उन्होंने लिखा कि क्यों उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने महाभियोग प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

जेटली ने अपनी पोस्ट में लिखा है, “कारोबारी और उद्योगपति कई बार संसद की कार्रवाई को प्रभावित करके नीतियों को अपने पक्ष में करवाने की कोशिश करते रहे हैं। किसी खास मकसद से सवाल उठाकर और संसद सदस्यों से पत्र लिखवाकर अपने व्यापारिक हित साधने की कोशिश भी की जाती रही है। अपने व्यापारिक हितों को साधने के लिए संसदीय कार्यवाही का इस्तेमाल करने के ये बहुत ही पुराने तरीके हैं।” जेटली ने आगे लिखा है, “बीते कई सालों में इस तरह की कोई कोशिशों का खुलासा होता रहा है। सिस्टम के जरिए ऐसे लोगों की मंशा और उनकी कुत्सित कोशिशों का भी पर्दाफाश होता रहा है। लेकिन नया परिदृश्य जो दिख रहा है, वह पहले से कुछ अलग है। बड़ी संख्या में नामी वकील अब संसद के सदस्य हैं। ज्यादातर राजनीतिक पार्टियां अब नामांकन इसी आधार पर दे रही हैं कि उनसे कोर्ट और संसदीय बहसों दोनों जगह काम काम चलवाया जा सके। माननीय सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव इसकी बानगी है।”

क्यों नहीं माना गया प्रस्ताव : अरुण जेटली लिखते हैं कि महाभियोग प्रस्ताव को दुर्लभतम से भी दुर्लभ प्रस्तावों में गिना जाता है। ऐसे मामलों में वो मामले भी शामिल हैं, जिसमें किसी जज के द्वारा दिए गए गलत फैसले पर उससे वरिष्ठ या फिर उसी स्तर के किसी जज ने अपने सेवाकाल के दौरान आपत्ति की हो। इस प्रस्ताव को लाने के लिए बहुत मजबूत और ठोस सबूतों की जरूरत होती है। यहां ये कहा जा सकता है कि अफवाहों और आशंकाओं को सबूत नहीं माना जा सकता है।

जज को नीचा दिखाना चाहती है कांग्रेस : अरुण ​जेटली ने लिखा है कि मौजूदा महाभियोग प्रस्ताव अविश्वासों और आशंकाओं से भरा हुआ था। इसे माननीय सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और उच्च स्तर पर बैठे हुए माननीय न्यायाधीशों को नीचा दिखाने के मकसद से लाया जा रहा था। ​कांग्रेस पार्टी जजों को अनचाहे विवादों में घसीटकर उन्हें विवादित बनाने में सक्षम है। उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के दिए उन फैसलों में खोट क्यों नहीं दिखता है, जिसमें उनकी पार्टी का हित छिपा होता है। किसी भी राजनीतिक समीक्षक के लिए ये साफ है कि महाभियोग प्रस्ताव को कभी भी दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सकता है। कांग्रेस पार्टी ये जानती है। इस प्रस्ताव का मकसद प्रस्ताव लाना नहीं है, बल्कि भारतीय न्यायपालिका को नीचा दिखाना है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App