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अरुण जेटली बोले- राष्ट्रवाद के वैचारिक संघर्ष में हमने पहला दौर जीता

जेटली ने कहा कि अब वह लोग, जो देश के खिलाफ नारे लगा रहे थे, यह कहने लगे हैं कि वह भारत माता की जय नहीं, पर जय हिंद बोलेंगे।

Author नई दिल्ली | Updated: March 27, 2016 12:58 AM
वित्तमंत्री अरुण जेटली (फाइल फोटो)

राष्ट्रवाद पर वैचारिक संघर्ष को आगे बढ़ाने का इरादा जाहिर करते हुए केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि भाजपा ने पहला दौर तो जीत लिया है क्योंक अब तक जो लोग भारत विरोधी नारे लगाते थे, अब ‘जय हिंद’ कहने को मजबूर तो हुए हैं। उन्होंने भगवा ब्रिगेड से दिल्ली और पूरे भारत में राजनीतिक जमीन घेरने का आह्वान करते हुए उम्मीद जताई कि देश के मतदाता कांग्रेस मुक्त भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे को हकीकत में बदल देंगे।

जेटली ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। राहुल गांधी ने जेएनयू में भारत विरोधी नारे लगाए जाने के बाद जेएनयू का दौरा किया था। जेटली ने कहा कि कुछ लोग उन सावरकर के राष्ट्रवाद पर सवाल उठा रहे हैं, जिन्होंने लाखों और करोड़ों देशवासियों को प्रेरित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यही लोग अब भारत को तोड़ने की बात करने वाले कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। यह हमारे लिए बड़ी चुनौती है। लिहाजा हमें इसे वैचारिक संघर्ष मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने वैचारिक संघर्ष का पहला दौर जीत लिया है। जो लोग देश के खिलाफ नारे लगा रहे थे, अब वे यह कहने लगे हैं कि वे भारत माता की जय नहीं, पर जय हिंद बोलेंगे।

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वित्त मंत्री ने दिल्ली भाजपा की कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि कम से कम वे देश के प्रति अपनी आस्था दिखाने के लिए कुछ तो कहने को तैयार हुए। उन्होंने कहा कि भाजपा की विचारधारा राष्ट्रवाद से प्रेरित है। यह अजीब स्थिति है जहां देश को तोड़ने की बात करना अभिव्यक्ति की आजादी माना जाता है। कानून या संविधान कहीं भी इसकी इजाजत नहीं देता। और यह सब देश की राजधानी में हो रहा है। जेटली ने दिल्ली में पार्टी कार्यकर्ताओं से अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोगों और महिलाओं तक पहुंचने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकार अगले कुछ दिन में ‘स्टैंड अप इंडिया’ योजना शुरू  करने वाली है जिसमें प्रत्येक बैंक शाखा अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति और महिलाओं को बड़े उपक्रम लगाने और बड़े उद्यमी बनने के लिए एक करोड़ रुपए के कर्ज देगी।

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कांग्रेस ने अपना आधार गंवा दिया है और भाजपा अब मुख्य पार्टी के रूप में उभर रही है। कांग्रेस पार्टी पूरे देश में डूब रही है और मतदाता कांग्रेस मुक्त भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे को हकीकत में बदल देंगे। उन्होंने कहा, ‘मोदी जी ने एक बार कांग्रेस मुक्त भारत का आह्वान किया था। कांग्रेस अरुणाचल प्रदेश से पहले ही बाहर हो चुकी है। वह उत्तराखंड में किसी भी दिन अपनी सरकार गंवा सकती है। केरल और असम विधानसभा के आने वाले चुनाव में भी कांग्रेस का सफाया होने के संकेत हैं। भारत के मतदाता मोदीजी के कांग्रेस मुक्त भारत के नारे को हकीकत में बदल देंगे। हम उस दिशा में बढ़ रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि इन दिनों कांग्रेस का मकसद किसी भी राजनीतिक गठबंधन की पूंछ बनने का है। यह क्रिकेट मैच में 10वें या 11वें नंबर का बल्लेबाज बनने जैसा है। बिहार में वे लालू प्रसाद और नीतीश कुमार से जुड़े। तमिलनाडु में वे द्रमुक से सीटें मांग रहे हैं। कांग्रेस हर गठबंधन की नई पूंछ है।

जेटली ने कांग्रेस को संसद में गतिरोध के लिए जिम्मेदार ठहराया और इसे मुख्यधारा से बाहर की पार्टी करार दिया। आप सरकार पर हमला करते हुए जेटली ने कहा कि यह रचनात्मक कार्य से ज्यादा टकरावों की सरकार है। भारत के टुकड़े होते देखना चाहने वाले लोगों के पक्ष में आए लोग अब दिल्ली में लोकतंत्र और विपक्ष को कुचलना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में दिल्ली में जगह सिर्फ भाजपा के लिए उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि एक समय भाजपा को केवल उत्तर भारत की पार्टी माना जाता था, आज एक मुख्य पार्टी बन चुकी है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा असम में सरकार बनाने और केरल में बड़ा लाभ हासिल करने की स्थिति में है।

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भाजपा के देशभर में अपना परचम लहराने का दावा करते हुए जेटली ने कहा कि इस तरह की जन स्वीकारोक्ति से तीन जिम्मेदारियां आती हैं, जो देश को तेजी से विकास के पथ पर ले जा सके, राष्ट्रीय एकता पर जब भी खतरे के बादल मंडराएं तो मजबूत आवाज बनी रहे और एक वैकल्पिक सरकार दे जो ईमानदार और जिम्मेदार हो। वित्त मंत्री ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा के बीच सबसे बड़ा भेद यह है कि भाजपा पारदर्शी सरकार में विश्वास करती है और उसने सक्षम जिम्मेदारी की व्यवस्थाएं बनाई हैं। हम अपने काम से ईमानदारी के निशान छोड़ रहे हैं, लेकिन जरा कांग्रेस के घोटालों की तरफ देखिए। कांग्रेस की सरकार जहां भी रही हो, पंजाब में, हिमाचल या फिर केरल, भ्रष्टाचार के आरोप लगातार बढ़ते जा रहे हैं। और फिर वह रोते हैं कि राजनीतिक षड्यंत्र है। पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह, जिनके परिजन पर विदेशी खातों में धन रखने का आरोप है, को निशाने पर लेते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि हमने तो उनसे नहीं कहा था कि वे स्विट्जरलैंड में बैंक खाता खोलें। यह तमाम आरोप जिनकी जांच हो रही है 2011 में कांग्रेस सरकार के सामने शुरू  हुए थे, जब उनकी सरकार थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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