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रफाल सौदा: जेटली बोले- राहुल और ओलांद में ‘मिलीभगत’, कहा- सबूत नहीं पर मन में प्रश्‍न

अरुण जेटली ने कहा कि 30 अगस्त को आखिर राहुल गांधी ने ट्वीट किया था कि कुछ देर का इंतजार कीजिए। पेरिस में एक बड़ा धमाका होने वाला है। और वही हुआ, जैसा उन्होंने संभावना जताया था।

अरुण जेटली ने कहा कि रफाल डील पर राहुल और ओलांद में मिलीभगत है। (Photo: ANI)

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आरोप लगाया कि, “रफाल सौदे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बीच ‘मिलीभगत’ है। 30 अगस्त को राहुल गांधी ट्वीट करते हैं कि फ्रांस के अंदर कुछ बम ब्लास्ट होने वाले हैं। ये बात उनको कैसे मालूम कि ऐसा बयान आने वाला है? ये जो जुगलबंदी है इस तरह की, मेरे पास कुछ सबूत नहीं है। लेकिन मन में प्रश्न खड़ा होता है। आखिर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति द्वारा रफाल डील पर को लेकर विवादित बयान इसी ट्वीट के बाद क्यों आता है। यह मात्र संयोग नहीं हो सकता कि दो देशों के विपक्षी नेताओं का रफाल सौदे पर एक विवादित बयान आता है।”

अरुण जेटली ने एनएनआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “एनडीए सरकार पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आरोप और रफाल सौदे पर ओलांद के बयान के बीच एक कनेक्शन हो सकता है।” ओलांद द्वारा 21 सितंबर को दिए गए बयान ‘फ्रांस सरकार को रफाल को लेकर ऑफसेट पार्टनर के रूप में रिलायंस के साथ जाने को कहा गया था’ और राहुल गांधी द्वारा 30 अगस्त को चेतावनी भरे लहजे में किया गया ट्वीट ‘अगले कुछ सप्ताह में बड़ा खुलासा होगा’, दोनों बयानों को जोड़ते हुए जेटली इसे दोनों नेताओं के बीच की ‘जुगलबंदी’ बताया। कहा कि यह दोनों की ‘मिलीभगत’ हो सकती है। जेटली ने कहा, “मुझे लगता है कि राहुल गांधी किसी तरह का बदला लेने के मूड में हैं। यदि यह जुगलबंदी होगी, तो इसके बावजूद मुझे किसी तरह का आश्चर्य नहीं होगा। 30 अगस्त को आखिर राहुल गांधी ने क्यों ट्वीट किया था, ‘कुछ देर का इंतजार कीजिए। पेरिस में एक बड़ा धमाका होने वाला है?’ और वही हुआ, जैसा उन्होंने संभावना जताया था।”

यह पूछे जाने पर, क्या वह यह आरोप लगा रहे हैं कि फ्रांस और भारत दोनोें देश के विपक्षी एक दूसरे से मिले हुए हैं? जेटली कहते हैं, “मैं नहीं जानता। लेकिन मैं देख रहा हूं कि लेकिन 30 अगस्त के ट्वीट और ओलांद के बयान के बीच एक तालमेल दिखता है। गलत बयान देने के अगले दिन ही ओलांद पीछे हटना शुरू कर देते हैं।” राहुल गांधी ने 30 अगस्त को ट्वीट किया था, “वैश्विक भ्रष्टाचार। यह रफाल एयरक्राफ्ट सच में तेजी से और दूर तक उड़ता है! इसके साथ ही आने वाले कुछ हफ्तों में बड़ा ब्लास्ट करने वाला है। मोदी जी, कृप्या अनिल को बता दीजिए, फ्रांस में एक बड़ी समस्या है।” कुछ दिनों बाद फ्रांस्वा ओलांद एक इंटरव्यू में कहते हैं, “डसॉल्ट के ऑफसेट पार्टनर चुनने में फ्रांस पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। भारत की ओर से रिलायंस का नाम आगे किया गया था।” जेटली इन दोनों बयानों के सामने आने के क्रम पर कहते हैं, “ये जो जुगलबंदी है, मेरे पास सबूत नहीं है, लेकिन मन में प्रश्न खड़ा होता है।”

हालांकि, बाद में ओलांद अपने बयान से पीछे हट जाते हैं। कनाडा में एएफपी को दिए अपने बयान में कहते हैं, “भारत ने डसॉल्ट के उपर रिलायंस के साथ काम करने का दबाव बनाया था या नहीं, इसका जवाब सिर्फ डसॉल्ट ही दे सकता है।” वहीं, डसाॅल्ट एविएशन, फ्रांस और भारत सरकार ने यह स्पष्ट किया कि ऑफसेट पार्टनर को लेकर रिलायंस और डसॉल्ट के बीच एक निजी समझौता हुआ था। इसमें न तो फ्रांस सरकार और न हीं भारत सरकार की किसी तरह की भूमिका रही है।

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