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रामजस कॉलेज विवाद पर वित्‍त मंत्री अरुण जेटली बोले- सिर्फ भारत में ही बुरा शब्‍द है राष्‍ट्रवाद

रामजस कॉलेज में जेएनयू छात्र उमर खालिद को बुलाए जाने को लेकर एबीवीपी और आइसा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई थी।

जेटली ने रामजस कॉलेज में हुई हिंसा के बाद कथित ‘राष्‍ट्रवाद’ को लेकर शुरू हुई बहस पर यह बयान दिया है। (Source: PTI/Facebook)

दिल्‍ली यूनिवर्सिटी की छात्रा गुरमेहर कौर के सोशल मीडिया कैम्पेन के बाद शुरू हुई ‘राष्‍ट्रवाद’ की बहस में अब वित्‍त मंत्री अरुण जेटली भी कूद पड़े हैं। गुरुवार को दिल्‍ली में एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के दौरान जेटली ने कहा कि ”राष्‍ट्रवाद अच्‍छा शब्‍द है, ये तो केवल इस देश में है कि राष्‍ट्रवाद बुरा शब्‍द है।” दूसरी तरफ, गुरमेहर कौर ने बुधवार को कहा कि वह अब अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहती हैं। उन्होंने मीडियाकर्मियों से अपील की कि उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए। दिल्‍ली के रामजस कॉलेज में जेएनयू छात्र उमर खालिद को बुलाए जाने को लेकर एबीवीपी और आइसा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई थी, जिसके बाद पुलिस ने बल-प्रयोग किया। इस घटना से दुखी गुरमेहर कौर ने एबीवीपी के खिलाफ सोशल मीडिया पर कैम्पेन चलाया था।  कौर ने एक तख्‍ती लेकर अपनी तस्‍वीर अपलोड की थी जिस पर लिखा था, ‘मेरे पिता को पाकिस्‍तान ने नहीं, जंग ने मारा’।

कौर के इस स्‍टैंड के बाद क्रिकेटर विरेंदर सहवाग ने तंज भरा ट्वीट किया, जिसपर अभिनेता रणदीप हूडा की प्रतिक्रिया कुछ लोगों को नागवार गुजरी। उनका यह कैम्पेन वायरल हो गया। इसके बाद गुरमेहर को कई खिलाड़‍ियों व राजनेताओं ने निशाना बनाया, जिससे हताश होकर उन्‍होंने खुद को पूरे अभियान से अलग कर लिया था।

वित्‍त मंत्री की मानें तो नोटबंदी के बाद अर्थव्‍यवस्‍था में तेजी आई है। उन्‍होंने कहा, ”नोटबंदी के बाद अर्थव्‍यवस्‍था तेजी से बढ़ी है, सच सामने आया है।” भारत अब भी दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था बनी हुई है। हालांकि, भारत की विकास दर अक्टूबर-दिसंबर की तिमाही में सात प्रतिशत ही रही। जो पिछली तिमाही से कम है। पिछली तिमाही में यह विकास दर 7.4 रही थी। 2016-17 में जीडीपी की वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 7.9 प्रतिशत रही थी।

वित्‍त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था कि नोटबंदी का सकारात्मक प्रभाव अप्रैल से बैंकिंग प्रणाली में नई नकदी डालने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिखने लगेगा। आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकान्त दास ने कहा था कि ”बैंकिंग प्रणाली में नई करेंसी डालने की प्रक्रिया जारी है। यह लगभग पूरी होने वाली है। तिमाही के दौरान उपभोग पर किसी तरह के प्रतिकूल असर का प्रभाव अगले साल तक नहीं खिंचेगा। अब यह पीछे छूट चुका है।”

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