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लड़ाकू विमान सौदे : अंतरराष्ट्रीय होड़ में भारतीय कंपनियां भी

पिछले साल फरवरी में, रक्षा मंत्रालय ने वायुसेना के लिए 83 तेजस लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए एचएएल के साथ 48,000 करोड़ रुपए के सौदे पर मुहर लगाई थी।

लड़ाकू विमान सौदे : अंतरराष्ट्रीय होड़ में भारतीय कंपनियां भी

लड़ाकू विमानों के सौदे की अंतरराष्ट्रीय होड़ में अब भारतीय विमान निर्माता कंपनियां भी उतरने लगी हैं। हिंदुस्तान एअरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) महत्त्वाकांक्षी बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान (एमआरएफए) कार्यक्रम के तहत भारत में लड़ाकू जेट बनाने के लिए किसी भी विदेशी सैन्य विमान विनिर्माता के साथ साझेदारी करने के लिए बेहतर स्थिति में है।

सरकार भारतीय वायुसेना के लिए 20 अरब डालर की लागत से 114 जेट खरीदने के लिए आगे बढ़ रही है, जिसे हाल के वर्षों में दुनिया के सबसे बड़े सैन्य खरीद कार्यक्रमों में से एक के रूप में माना जा रहा है। शुरू में यह संकेत दिया गया था कि विमान को रणनीतिक साझेदारी (एसपी) माडल के तहत खरीदा जाएगा, जो किसी विदेशी विनिर्माता को प्रमुख सैन्य आयुध निर्माण के लिए किसी भारतीय कंपनी के साथ हाथ मिलाने की बात कहता है।

सरकारी वैमानिकी कंपनी के प्रमुख आर माधवन के मुताबिक, सरकार को एमआरएफए परियोजना के तहत भारतीय वायुसेना के लिए विमान पर फैसला करना चाहिए और भारतीय भागीदार चुनने का काम विमान विनिर्माता पर छोड़ देना चाहिए। उनके मुताबिक, ‘हमारे बुनियादी ढांचे और अनुभव के साथ, एचएएल विमान उत्पादन के लिए किसी विदेशी इकाई के साथ हाथ मिलाने के लिए बेहतर स्थिति में है। निश्चित रूप से, हम इस परियोजना के लिए भारतीय इकाई बनने पर विचार कर रहे हैं।’

यह पूछे जाने पर कि क्या विशाल परियोजना को रणनीतिक साझेदारी माडल के तहत क्रियान्वित किया जाना चाहिए, एचएएल प्रमुख ने केवल इतना कहा कि इसे व्यवसाय प्रतिष्ठानों पर छोड़ दिया जाना चाहिए कि वे अपना समाधान खोजें। वायुसेना के लिए सौदा : अप्रैल 2019 में, वायुसेना ने 114 जेट हासिल करने के लिए आरएफआइ (सूचना के लिए अनुरोध) या एक प्रारंभिक निविदा जारी की थी।

सौदे के शीर्ष दावेदारों में लाकहीड मार्टिन का एफ-21, बोइंग का एफ/ए-18, डसाल्ट एविएशन का राफेल, यूरोफाइटर टाइफून, रूसी विमान मिग-35 और साब का ग्रिपेन शामिल है। पिछले हफ्ते, वायुसेना प्रमुख एअर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने कहा था कि विशाल परियोजना के विजेता को प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण सुनिश्चित करना होगा क्योंकि इसे ‘मेक इन इंडिया’ पहल के ढांचे के तहत क्रियान्वित किया जाएगा।

माधवन ने 126 मध्यम बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान (एमएमआरसीए) के बेड़े की खरीद के लिए बातचीत के हिस्से के रूप में भारत में राफेल जेट के उत्पादन के वास्ते लगभग एक दशक पहले एचएएल और डसाल्ट एविएशन के बीच हुए जमीनी कार्य का भी हवाला दिया।

मूल प्रस्ताव में एचएएल के सहयोग से फ्रांस में 18 और भारत में 108 विमानों का विनिर्माण किया जाना था। एमएमआरसीए के लिए अंतिम वार्ता 2014 की शुरुआत तक जारी रही, लेकिन सौदा नहीं हो सका। वर्ष 2016 में, राजग सरकार ने 36 राफेल जेट खरीदने के लिए फ्रांस के साथ 7.87 अरब यूरो (59,000 करोड़ रुपए) के सौदे पर हस्ताक्षर किए।

पिछले साल फरवरी में, रक्षा मंत्रालय ने वायुसेना के लिए 83 तेजस लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए एचएएल के साथ 48,000 करोड़ रुपए के सौदे पर मुहर लगाई थी। मलेशिया की पसंद बना तेजस : भारत का ‘तेजस’ हल्का लड़ाकू विमान मलेशिया की पहली पसंद बनकर उभरा है और यह दक्षिण-पूर्व एशियाई देश अपने पुराने हो चुके लड़ाकू विमानों को बदलना चाहता है।

एचएएल निर्मित तेजस ने प्रतिस्पर्धा में शामिल चीनी और दक्षिण कोरियाई विमानों को पछाड़ दिया है। चीनी विमान जेएफ-17, दक्षिण कोरियाई विमान एफए-50 और रूस के मिग-35 तथा याक-130 से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद भी मलेशिया ने तेजस पर भरोसा जताया है। तेजस विमानों को लेकर दोनों पक्ष वार्ता कर रहे हैं, ताकि खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। भारत ने पैकेज के तहत मलेशिया में एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल) सुविधा स्थापित करने की पेशकश की है, क्योंकि मास्को पर लगे प्रतिबंध के कारण रूस से खरीदे गए एसयू-30 विमानों के कलपुर्जों की खरीद में मलेशिया को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

बेहतर विमान

जेएफ-17 और एफए-50 की तुलना में तेजस काफी बेहतर विमान है और भारतीय विमानों के चयन से मलेशिर्या को भविष्य में अपने बेड़े के उन्नयन के लिए एक विकल्प मिलेगा। एचएएल द्वारा निर्मित तेजस एक एकल इंजन और अत्यधिक सक्षम बहु-भूमिका वाला लड़ाकू विमान है, जो उच्च-खतरे वाले वायु वातावरण में संचालन में सक्षम है।

पिछले साल फरवरी में रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए 83 तेजस लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए एचएएल के साथ 48,000 करोड़ रुपए का सौदा किया था। भारत ने तेजस के एमके-2 संस्करण के साथ-साथ पांचवीं पीढ़ी के उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) को विकसित करने के लिए पांच अरब अमेरिकी डालर की महत्त्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू कर दिया है।

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