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जेल में बंद होने पर भी लोग लड़ सकेंगे चुनाव: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोषी व्यक्तियों के अलावा जेल में बंद व्यक्तियों को चुनाव लड़ने की अनुमति प्रदान करने वाले जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन के खिलाफ दायर याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाले पीठ ने कहा- यदि दोषसिद्धि और सजा हो गई है तो हम समझ सकते हैं। लेकिन […]

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोषी व्यक्तियों के अलावा जेल में बंद व्यक्तियों को चुनाव लड़ने की अनुमति प्रदान करने वाले जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन के खिलाफ दायर याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाले पीठ ने कहा- यदि दोषसिद्धि और सजा हो गई है तो हम समझ सकते हैं।

लेकिन प्राथमिकी दर्ज होने और जेल में बंद होने के आधार पर किसी व्यक्ति को चुनाव लड़ने से वंचित करना पर्याप्त नहीं है। न्यायाधीशों ने दिल्ली हाईकोर्ट के छह फरवरी के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने इस संशोधन की संवैधानिक वैधता को सही ठहराया था।

हाईकोर्ट ने कहा था कि गिरफ्तार आरोपी या विचाराधीन कैदी को जेल में बंद होने के आधार पर चुनाव लड़ने से वंचित करने से राजनीतिक विद्वेष के कारण जेल में बंद करने का रास्ता खुल जाएगा। तब तो एक राजनीतिक या सत्तारूढ़ पार्टी को अपने विरोधियों को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए सिर्फ यही करना होगा कि पुलिस को मामला दर्ज करने और विरोधी को गिरफ्तार करने के लिए कहा जाए।

शीर्ष अदालत ने पिछले साल दस जुलाई को व्यवस्था दी थी कि मौजूदा स्थिति के तहत पुलिस हिरासत या जेल में बंद व्यक्ति विधायी संस्थाओं का चुनाव नहीं लड़ सकता है। इसके बाद केंद्र ने जन प्रतिनिधित्व कानून में संशोधन कर जेल में बंद व्यक्तियों को चुनाव लडने की अनुमति देने का प्रावधान किया था।

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