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प. बंगाल:…तो अगले साल फरवरी में बढ़ेगी जन्मदर

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मार्च के आखिरी सप्ताह से जून पहले सप्ताह तक बंद पूर्णबंदी की वजह सरकारी अस्पतालों में परिवार नियोजन कार्यक्रम जैसे गर्भपात, अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक उपकरण स्थापित करना, कंडोम वितरित करना व गर्भनिरोधक गोलियों का वितरण लगभग बंद हो गया था

Author कोलकाता | August 12, 2020 5:16 AM
west bengal mamata banerjee ram mandir bhoomi poojan bjp5 अगस्त को लॉकडाउन के खिलाफ बीजेपी ने ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा। (फाइल फोटो)

शंकर जालान

मार्च से आखिरी सप्ताह से अगस्त के पहले सप्ताह तक देश में काफी कुछ बदला और इस बदलाव से पश्चिम बंगाल भी अछूता नहीं रहा। इस दौरान जहां सूबे में कोरोना पीड़ित व कोरोना मृतकों की संख्या में इजाफा हुआ। वहीं, गर्भ निरोधकों की कम उपलब्धता की वजह से अनचाहे मातृत्व मामले में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि परिपक्व और पूर्व परिपक्व गर्भधारण की संभावना अधिक है, जिसके कारण असुरक्षित गर्भपात, मातृ मृत्यु और अगले साल के जन्म दर में तेजी आ सकती है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि कोरोना काल के दौरान जारी लंबी पूर्णबंदी की वजह से गर्भ निरोधकों जैसे मौखिक गोलियों की गरीबों तक कम पहुंच के कारण परिवार नियोजन सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं।

शहर के एक प्रमुख सरकारी अस्पताल से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक चालू वर्ष अप्रैल, मई और जून में केवल 3,820 व्यक्तियों ने गर्भनिरोधक एकत्र किए थे, जबकि पिछले वर्ष इसी तीन महीने में यह आंकड़ा 15,760 था। इसी तरह पिछले तीन महीनों में केवल 350 लोगों ने मौखिक गोलियां एकत्र कीं, जबकि पिछले वर्ष इस दौरान 1,394 लोग उक्त सुविधा के लिए आए थे। एक अन्य सरकारी अस्पताल में जनवरी, फरवरी और मार्च 2020 में 44 हजार से अधिक व्यक्तियों ने गर्भ निरोधकों का संग्रह किया और फिर पूर्णबंदी लागू होने के बाद यह आंकड़ा 31 जुलाई तक लगभग 20500 तक गिर गया।

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मार्च के आखिरी सप्ताह से जून पहले सप्ताह तक बंद पूर्णबंदी की वजह सरकारी अस्पतालों में परिवार नियोजन कार्यक्रम जैसे गर्भपात, अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक उपकरण स्थापित करना, कंडोम वितरित करना व गर्भनिरोधक गोलियों का वितरण लगभग बंद हो गया था।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ अनुपम नाग ने बताया कि जिन महिलाओं को गर्भवती हुए 20 सप्ताह अधिक हो गए हैं वे अब कानूनी रूप से गर्भपात के लिए स्वास्थ्य सेवा केंद्रों में नहीं जा सकती। अत: ऐसी गर्भवती महिलाएं यदि गर्भपात के लिए अवैध तरीके अपनाने की कोशिश करती हैं, तो यह उनके जीवन के लिए जोखिम भरा होगा। उन्होंने कहा कि कई महिलाओं अपने गर्भनिरोधक चक्र को स्मरण करते हुए पूर्णबंदी के दौरान मौखिक गोलियों का इस्तेमाल किया। ऐसे मामलों में भ्रूण को नुकसान पहुंच सकता है।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि चूंकि अनचाहे गर्भ की शिकार महिलाएं अब परिस्थितिवश गर्भपात के लिए नहीं जा सकती हैं, हम इस साल और फरवरी 2021 के अंत के बीच जन्म दर में तेजी की उम्मीद कर रहे हैं।

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