मानसून सत्र के दौरान 10 अगस्त को अमित शाह सदन में मौजूद रह सकते हैं और उनकी मौजूदगी में’फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026′ (FCRA) पेश हो सकता है। इसे संभावना को देखते हुए विपक्ष ने यह पक्का करने के लिए पहला कदम उठाया है कि उसके सदस्य सभी सदन में मौजूद रहें ताकि सदन में संख्या बल का प्रदर्शन किया जा सके।

कांग्रेस ने शुक्रवार दोपहर एक थ्री-लाइन व्हिप जारी कर अपने सभी सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को लोकसभा में मौजूद रहने का निर्देश दिया है। वहीं, अन्य विपक्षी दलों के भी ऐसा करने की संभावना है। इधर केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि अभी तक सत्र को बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

मिजोरम के मुख्यमंत्री ने की थी अमित शाह से मुलाकात

इससे पहले गुरुवार को मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने अमित शाह से मुलाकात की और बिल को लेकर चिंता जताते हुए एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री ने संकेत दिया कि बिल 12 अगस्त को लोकसभा में पेश किया जा सकता और उन्हें भरोसा भी दिया है कि इसमें कोई ‘रेट्रोस्पेक्टिव’ (पिछली तारीख से लागू होने वाला) प्रावधान नहीं होगा। उन्होंने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, “गृह मंत्री ने मुझे भरोसा दिलाया कि इसमें ‘रेट्रोस्पेक्टिव’ क्लॉज नहीं होगा।”

सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार सुबह राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में हुई एक बैठक के दौरान कांग्रेस नेतृत्व ने अपने सहयोगियों से कहा कि वे यह पक्का करें कि सोमवार से सभी पार्टियों के सांसद सदन में मौजूद रहें।

सभी सांसद रहें मौजूद- विपक्ष

शुक्रवार को हुई बैठक में मौजूद एक सूत्र ने कहा, “हमें उम्मीद है कि जब FCRA बिल पर चर्चा होगी तो अमित शाह सदन में आ सकते हैं, क्योंकि यह मामला गृह मंत्रालय से जुड़ा है। और हम चाहेंगे कि जब अमित शाह आएं, तो सभी सांसद सदन में मौजूद रहें।”

विपक्ष कर रहा अमित शाह के आने की मांग

सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष अमित शाह को सदन में आने की मांग कर रहा है कि सदन में आकर 20 जुलाई को छात्रों के संसद चलो मार्च के दौरान हुई पुलिस की कार्रवाई के बारे में बयान दें। इस मांग के कारण कई दिनों तक सदन की कार्यवाही में बाधा बनी रही। गुरुवार को राज्यसभा के चेयरमैन और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने किरेन रिजिजू से कहा कि वे अमित शाह तक विपक्ष की भावनाएं पहुंचाएं और सदन में उनकी मौजूदगी की मांग पर विचार करें।

लोकसभा में कांग्रेस के व्हिप मणिकम टैगोर ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “हम अगले सप्ताह परिसीमन बिल और FCRA बिल के लिए तैयार हैं। हमें पता है कि अमित शाह 12 दिनों से सदन से गायब हैं। अब वे देश में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से ध्यान भटकाने की कोशिश करेंगे।”

विपक्ष के साथ खड़े- सपा सांसद

सपा के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि पार्टी विपक्ष के साझा एजेंडे का जरूर समर्थन करेगी। सांसद ने कहा, “हम विपक्ष के साथ खड़े रहे हैं और आगे भी रहेंगे। जरूरत पड़ने पर हम व्हिप जारी करेंगे। लेकिन शायद इसकी जरूरत न पड़े क्योंकि हमारे सभी सांसद वैसे भी सदन में मौजूद हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “हमें अभी यह नहीं पता है कि अमित शाह FCRA बिल के लिए सदन में आएंगे या नहीं, क्योंकि सरकार बिल पर चर्चा के लिए MoS (गृह) नित्यानंद राय को भेज सकती है।”

FCRA बिल विवाद का विषय रहा है क्योंकि ईसाई संगठनों को बिल के एक प्रावधान को लेकर चिंता है। उनका मानना है कि यह प्रावधान सरकार की ओर से तय अथॉरिटी को उन संगठनों की संपत्ति पर पिछली तारीख से लागू होने वाले अधिकार देता है, जिनका FCRA रजिस्ट्रेशन खत्म हो चुका है।

TMC के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि पार्टी ने अपने सभी सांसदों से सोमवार से सदन में मौजूद रहने को कहा है। आगे कहा, “कुछ पार्टियां औपचारिक व्हिप जारी करती हैं, तो कुछ अनौपचारिक रूप से ऐसा करती हैं। विपक्ष के सभी सांसदों से सोमवार से संसद में मौजूद रहने के लिए कहा गया है।”

FCRA बिल BJP के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि कई चर्च और ईसाई संस्थान विदेशी चंदे से बनाए गए हैं, जो FCRA के तहत रेगुलेट होते हैं। पार्टी ईसाइयों के बीच, खासकर केरल में, अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है, इसलिए वह इन चिंताओं को दूर करने की इच्छुक है।

विपक्ष करेगा विरोध

सरकार ने बुधवार को संकेत दिया था कि FCRA बिल में कोई दंडात्मक पूर्वव्यापी प्रावधान नहीं होगा। विपक्ष के सूत्रों ने कहा कि पार्टियां बिल पर चर्चा में हिस्सा तो लेंगी, लेकिन इसका विरोध करेंगी। साथ ही, वे 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित ज्यादतियों पर शाह के सदन में बयान देने की अपनी बार-बार की मांग को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश करेंगी।

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लोकसभा में बुधवार को एंटी पेपर लीक बिल (लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 – The Public Examination (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill – 2026) ध्वनि मत से पारित हुआ। इस बिल पर मानसून सत्र के दौरान लंबी चर्चा हुई। इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में एंटी पेपर बिल के पास होने का ऐलान किया। इसके बाद सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई।