25 फीसद कार, जीप और वैन वाहन देश में राजमार्ग पर फास्टैग वार्षिक पास का प्रयोग कर रहे हैं। इस योजना के शुरू होने के बाद से अब तक देश में लगभग 42 लाख वार्षिक पास सक्रिय किए जा चुके हैं, जो वाणिज्यिक और गैर-वाणिज्यिक श्रेणी के तहत आते हैं। इन पास के माध्यम से 19 करोड़ रुपए से अधिक का लेनदेन हुआ है। इस मद में सरकार को दिसंबर 2025 तक कुल 1265 करोड़ रुपए की आय प्राप्त हुई है। हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस जानकारी की पुष्टि की है।

वित्त वर्ष 2025-26 में (दिसंबर 2025 तक) राष्ट्रीय राजमार्गों से फास्टैग के माध्यम से औसत दैनिक संग्रह करीब 186 करोड़ रुपए है और प्लाजा पर औसतन इलेक्ट्रॉनिक टोल पर लेन-देन की संख्या 105 लाख है। रपट के मुताबिक, फास्टैग वार्षिक पास राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रहण (एनइटीसी) प्लेटफार्म से उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वाहन को पास जारी करने से पहले ही उसके वाणिज्यिक या गैर-वाणिज्यिक वाहन की स्थिति की जांच कर ली जाती है।

यह जांच परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के आधार पर की जाती है और बाद में इसे भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के माध्यम से सत्यापित किया जाता है, ताकि वार्षिक पास के दुरुपयोग को रोका जा सके। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद देश के सभी राज्यों में टोल टैक्स के माध्यम से सरकार को अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है। ज्ञात हो कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने 15 अगस्त 2025 से ही वार्षिक पास सेवा की शुरुआत की है।

मंत्रालय के मुताबिक, चुनिंदा राजमार्ग खंडों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान कैमरों का उपयोग करते हुए बाधा मुक्त इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (ETC) प्रणाली को लागू किया गया है। यह फास्टैग के अतिरिक्त एक अन्य सुविधा है, जिसके तहत वाहन चालक बिना रुके और धीमी गति किए ही शुल्क का भुगतान कर सकते हैं।

सरकार ने वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह कार्यक्रम का प्रभाव आंकलन किया। यह आंकलन बताता है कि एक टोल प्लाजा को पार करने में वाहन को औसतन 40 सेकंड का समय लगता है, जबकि मानवश्रम (मैनुअल) प्रक्रिया में प्रति वाहन 12.23 मिनट का समय लगता था। इस पहल से टोल प्लाजा पर वाहनों की भीड़ को कम करने में भी मदद मिली है।

जल्द ही यहां भी लगेगी इटीएस प्रणाली

जल्द ही हरियाणा, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और असम में भी ITS प्रणाली लागू की जा रही है। इन राज्यों के घरौंडा, चोरायासी, दौलतपुरा, मोहनपुरा, शाहजहांपुर, मुंडका, कनिमिनेखी, गणंगुरू, बोरियाच, नेमिली, चेनसमुद्रम, पारनुर, कासेपल्ली, अमाकाथाडु, मारूर, बिजवासन, कुकरोला, चालकवाड़ी, हिवारगांव, पावसा, मदनपुर, बदरपुर और फरीदाबाद शुल्क प्लाजा पर यह सुविधा उपलब्ध होगी।

टोल से संबंधित प्रावधान

राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमावली 2008 के तहत राजमार्ग शुल्क प्लाजा स्थापित किए जाते हैं। इसके अनुसार, शुल्क प्लाजा राष्ट्रीय राजमार्ग के खंड पर और उसी दिशा में 60 किलोमीटर की दूरी के भीतर स्थापित नहीं किया जाएगा। हालांकि, यदि निष्पादन अधिकारी आवश्यक समझें तो रियायतग्राही को 60 किलोमीटर की दूरी में शुल्क प्लाजा स्थापित करने और 60 किमी की दूरी के भीतर एक अन्य प्लाजा स्थापित करने की अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते यह शुल्क प्लाजा स्थायी पुल, बाईपास या सुरंग के लिए शुल्क संग्रहण हेतु हो।