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मेजर गोगोई को सम्‍मान दिए जाने से नाराज है जीप के आगे बांधा गया शख्‍स, मानवाधिकार आयोग से की शिकायत

डार ने मेजर गोगोई को सेना द्वारा सम्‍मानित किए जाने के खिलाफ आयोग में शिकायत की है।
भारतीय सेना के मेजर नितिन गोगोई (बाएं) द्वारा जीप के आगे कश्मीरी युवक फारूक डार को मानव-ढाल बनाकर बांधने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। (फोटो सोर्स इंडियन एक्सप्रेस)

जम्‍मू-कश्‍मीर में उपचुनाव के दौरान पत्‍थरबाजी रोकने के लिए स्‍थानीय नागरिक को ‘मानव ढाल’ की तरह इस्‍तेमाल करने वाले सेना के मेजर लेतुल गोगोई को सम्‍मानित किया गया। आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने खुद मेजर की सूझबूझ की सराहना की। केंद्र सरकार ने भी मेजर के ‘प्रजेंस ऑफ माइंड’ की तारीफ की, मगर सोशल मीडिया पर मेजर गोगोई की इस कार्रवाई के पक्ष और विपक्ष में आवाजें उठ रही हैं। इन सबके बीच जीप के आगे ‘मानव ढाल’ बनाकर इस्‍तेमाल किए गए कश्‍मीरी नागरिक फारुक डार ने राज्‍य मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है। डार ने मेजर गोगोई को सेना द्वारा सम्‍मानित किए जाने के खिलाफ आयोग में शिकायत की है।

सेना प्रमुख का प्रशस्ति पत्र शौर्य या विशिष्ट व्यक्तिगत प्रदर्शन या कामकाज के प्रति समर्पण के लिए दिया जाता है। तीनों सेनाओं के प्रमुख अपने अधिकारियों और सैनिकों में से चुने गए अफसरों को इस तरह के सम्मान देते हैं। सेना ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि मेजर गोगोई को सीओएएस कमेंडेशन (सेना प्रमुख का प्रशस्ति पत्र) प्रदान किया गया है।

कश्मीरी युवक फारुक अहमद डार को जीप के बोनट से बांधकर पत्थरबाजों को नियंत्रित करने की घटना नौ अप्रैल की है। उस दिन श्रीनगर लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान कराए जा रहे थे। 53 राष्ट्रीय राइफल के मेजर गोगोई बडगाम में अपने साथी सैनिकों, चुनावी ड्यूटी के लिए तैनात 12 अधिकारियों, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के नौ सैनिकों और दो पुलिसकर्मियों के पांच वाहनों वाले काफिले का नेतृत्व कर रहे थे। इस काफिले को पत्थरबाजों ने घेर लिया था। सुरक्षा कर्मियों पर पत्थर बरसाए जाने लगे।

भीड़ से अपने काफिले को बचाने के लिए मेजर गोगोई ने प्रदर्शनकारियों में शामिल कश्मीरी युवक को जीप की बोनट से बांधकर मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया। इसका वीडियो वायरल होने के दो दिन बाद बीरवाह पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था। सेना की ओर से भी पूरे मामले की कोर्ट ऑफ इंक्‍वायरी के आदेश दिए गए थे।

केंद्रीय रोड ट्रांसपोर्ट, हाईवे और शिपिंग मंत्री नितिन गडकरी भी मेजर लेतुल गोगोई की तारीफ कर चुके हैं और उन्हें पद्म भूषण दिए जाने की मांग कर चुके हैं। गडकरी ने एबीपी न्यूज से बात करते हुए कहा, ‘मेजर गोगोई ने अपनी बुद्धीतत्परता का इस्तेमाल करके जवानों की जान बचाई। यह उनकी रणनीति थी। मुझे लगता है कि उनको पद्म भूषण मिलना चाहिए।’

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  1. A
    Ajit Rajput
    May 25, 2017 at 2:47 pm
    में सब से पहले मेजर लेतुल गोगोई जी को सलाम करूँगा जिन्होंने बहुत ही ी निर्णय ले कर सब की जान बचाई है. अगर पथरबाज लोग सैनिको को की जान ले लेते तो क्या मानवाधिकार पथरबाजो पर भी वैसे ही कार्यवाही करता जैसा सेना के लिए करेगा. जान बचाना उस वक़्त जायदा जरुरी था. सेना चाहती तो चला कर भी सब शांत कर सकती थी पर वो भी कायदे में रह कर काम करती है. वैसे भी ये सब भाड़े के पथरबाज है जो कौड़ियों के दाम में मिल जायेंगे कश्मीर में, इनको बोलोगे तो खुद के लोगो पे भी पत्थर फेकने को तैयार हो जायेंगे. इनको बस पैसे चाहिए, न तो इनको मजहब से कुछ लेना है, न राजनीती से, न कश्मीर से, ये लोग भूके भिकारी है आज के तारिक में, सालो से भारत के खैरात के पैसे पे जी रहे है. इन पर सिर्फ खर्चा हो रहा है मुनाफा कुछ भी नहीं. मेजर लेतुल गोगोई जी के लिए मैडल तो बनता है इस में कोई शक नहीं. में तो कहता हूँ हर आर्मी के ी पे इन पथरबाजो को पकड़ का बाँधा देना चाहिए हमेशा क लिए. न पत्थर बरसेंगे न चलेगी. शांति से जो आंदोलन करना है करो.
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